भोपाल। अपनी लंबित मांगों और न्यूनतम वेतन में वृद्धि को लेकर प्रदेशभर के ठेका श्रमिक, अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों ने राजधानी के नीलम पार्क में जोरदार प्रदर्शन किया। अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के बैनर तले एकजुट हुए हजारों कर्मचारियों ने रैली निकालकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे सामूहिक आत्मदाह जैसा आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होंगे। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा घोषित 12,425 से 16,769 रुपए का वेतन अपर्याप्त है; कर्मचारियों की मांग है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 26 हजार रुपए किया जाए। उन्होंने यह भी एलान किया कि यदि समाधान नहीं निकला, तो 6 जुलाई को जबलपुर हाईकोर्ट के सामने बड़ा प्रदर्शन कर न्याय की गुहार लगाई जाएगी। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने विभिन्न विभागों में हो रहे शोषण का मुद्दा भी उठाया।
नर्मदापुरम से आए राजस्व कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनसे बीएलओ, केवाईसी और फार्मर आईडी जैसे महत्वपूर्ण काम तो कराए जाते हैं, लेकिन मानदेय के नाम पर महज औपचारिकता निभाई जाती है। आलम यह है कि एक खसरा पंजीयन के बदले मात्र 8 रुपए का भुगतान किया जा रहा है और विरोध करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत और आयुष जैसे विभागों में आज भी हजारों कर्मचारी 3 से 8 हजार रुपए के अल्प वेतन पर काम कर रहे हैं, जो केंद्र सरकार के मानकों का सीधा उल्लंघन है। आंदोलनकारियों ने सरकार से आउटसोर्स व्यवस्था की समीक्षा करने, न्यूनतम वेतन की गारंटी देने और नियमितीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है।
