नई दिल्ली। भारत की ग्रामीण रोजगार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G अधिनियम, 2025 को अधिसूचित कर दिया है । यह नया कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू होगा, जिसके साथ ही वर्ष 2005 से प्रभावी मनरेगा समाप्त हो जाएगा । इस नए अधिनियम का मुख्य उद्देश्य न केवल रोजगार देना है, बल्कि ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण के तहत उत्पादक ग्रामीण संपत्तियों का निर्माण करना भी है ।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मनरेगा से इस नई योजना में परिवर्तन पूरी तरह बाधारहित होगा और पुराने जॉब कार्ड नए कार्ड जारी होने तक मान्य रहेंगे । इस नए कानून के तहत सबसे बड़ा बदलाव रोजगार के दिनों में किया गया है। अब ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 के स्थान पर 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी । काम की मांग करने के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा, अन्यथा श्रमिक बेरोजगारी भत्ते के हकदार होंगे । मजदूरी का भुगतान सीधे बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से किया जाएगा और इसमें देरी होने पर 0.05% प्रतिदिन की दर से मुआवजा भी देना होगा । कार्यस्थल पर उपस्थिति के लिए फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का उपयोग होगा, हालांकि तकनीकी समस्याओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी रखी गई है ।
नए अधिनियम के तहत होने वाले कार्यों को ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ से जोड़ना अनिवार्य होगा, जिसे ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित किया जाएगा । यह योजना मुख्य रूप से जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित होगी । खास बात यह है कि इसमें ठेकेदारों और मशीनों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा । पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर कार्यस्थल पर ‘जनता बोर्ड’ लगाया जाएगा और ग्राम पंचायतों द्वारा साप्ताहिक प्रकटीकरण बैठकें आयोजित की जाएंगी ।
इसके अलावा, कृषि के व्यस्त मौसम (बुवाई-कटाई) के दौरान श्रम उपलब्धता बनाए रखने के लिए राज्यों को कार्य स्थगित करने की अवधि अधिसूचित करने का अधिकार भी दिया गया है ।
