भोपाल। राजधानी के जागृत एवं दर्शनीय तीर्थस्थल दादाजी धाम मंदिर में ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या के पावन अवसर पर सुहागिन महिलाओं द्वारा अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से श्रद्धा, विश्वास एवं धार्मिक विधि-विधान के साथ वट सावित्री व्रत किया गया। इस वर्ष व्रत का विशेष महत्व इसलिए भी रहा क्योंकि भरणी एवं कृतिका नक्षत्र के शुभ संयोग के साथ सौभाग्य योग निर्मित हुआ तथा शनिवार को अमावस्या होने से शनिचरी अमावस्या एवं शनि जयंती का पुण्यकारी योग भी प्राप्त हुआ।
प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में भक्त महिलाओं की उपस्थिति प्रारंभ हो गई थी। महिलाओं ने विधिपूर्वक वटवृक्ष का पूजन कर कच्चा सूत बांधा, दीप प्रज्वलित किए तथा भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश एवं माता सावित्री का स्मरण कर परिवार के कल्याण की प्रार्थना की। पूजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चारण एवं धार्मिक स्तुतियों से सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। धार्मिक मान्यताओं एवं पुराणों के अनुसार वटवृक्ष में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश का निवास माना गया है। माता सावित्री ने अपने तप, निष्ठा एवं पतिव्रत धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण पुनः प्राप्त किए थे, उसी आदर्श स्मृति में विवाहित महिलाएं यह व्रत करती हैं। चूंकि वटवृक्ष दीर्घायु, स्थिरता, शक्ति एवं अखंड जीवन का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसकी पूजा विशेष फलदायी मानी गई है।
मंदिर प्रांगण में महिलाओं ने वटवृक्ष की परिक्रमा कर परिवार की मंगलकामना की तथा सुख-शांति, आरोग्य एवं अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा। शनिचरी अमावस्या एवं शनि जयंती के अवसर पर भगवान शनिदेव का ध्यान भी किया गया। श्रद्धालुओं ने प्रार्थना की कि भगवान शनिदेव की कृपा सभी भक्तों एवं उनके परिवारों पर बनी रहे तथा जीवन में सुख, समृद्धि और धर्म का प्रकाश बना रहे। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित रहा तथा उपस्थित श्रद्धालुओं ने दादाजी गुरुदेव के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए धर्म, सेवा एवं सद्भावना के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
