नई दिल्ली। देश की अग्रणी महारत्न पीएसयू कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) के लिए रक्षा क्षेत्र से एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय नौसेना से कंपनी को 8,000 करोड़ से लेकर 10,000 करोड़ तक का एक बड़ा डिफेंस ऑर्डर मिल सकता है। यह संभावित ऑर्डर नौसेना के युद्धपोतों और बड़े जहाजों के लिए 35 से 40 स्वदेशी ’40 मेगावाट मरीन गैस टर्बाइन’ की आपूर्ति से जुड़ा हुआ है। केंद्र सरकार के वर्ष 2035 तक 50 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां बनाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को देखते हुए नौसेना को भारी संख्या में हाई-पावर मरीन इंजन की आवश्यकता है।
चूंकि भेल पहले ही इस क्षमता के मरीन गैस टर्बाइन सफलतापूर्वक विकसित कर चुकी है, इसलिए कंपनी को इस बड़े स्वदेशी प्रोजेक्ट के लिए सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, इस विषय पर अभी तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। यह मेगा डील पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ी है, जो भेल के डिफेंस बिजनेस के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। कंपनी अब केवल पारंपरिक पावर सेक्टर तक सीमित न रहकर लगातार हाई-टेक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है। इसी कड़ी में भेल ने हाल ही में डीआरडीओ की विशाखापट्टनम स्थित प्रयोगशाला ‘नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी’ के साथ एक महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर एग्रीमेंट भी किया है।
इसके तहत कंपनी युद्धपोतों को दुश्मन की इंफ्रारेड ट्रैकिंग से बचाने वाली अत्याधुनिक LM2500 गैस टर्बाइन इंफ्रारेड सप्रेशन सिस्टम तकनीक पर काम कर रही है। रक्षा क्षेत्र के ये प्रोजेक्ट्स न केवल लंबे समय तक चलने वाले होते हैं, बल्कि इनमें बेहतर मार्जिन मिलने की भी संभावना रहती है, जो भेल के बिजनेस प्रोफाइल को एक नया आयाम दे सकते हैं। अगर कंपनी की मौजूदा वित्तीय स्थिति और परिचालन क्षमता की बात करें, तो वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) भेल के लिए बेहद शानदार रहा है। इस दौरान कंपनी का सालाना टर्नओवर 18 प्रतिशत की बढ़त के साथ लगभग ₹32,350 करोड़ पर पहुंच गया है।
मजबूत एग्जीक्यूशन के दम पर कंपनी ने वर्षभर में करीब ₹75,000 करोड़ के नए ऑर्डर हासिल किए हैं, जिससे भेल की कुल ऑर्डर बुक अब ₹2.4 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुकी है। इसके साथ ही पावर सेक्टर में भी कंपनी ने रिकॉर्ड 8.9 गीगावाट क्षमता को कमीशन और सिंक्रोनाइज करने में सफलता पाई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि नौसेना के साथ यह रक्षा समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह भेल के भविष्य की कमाई और बाजार में इसकी स्थिति को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
