भोपाल। राजधानी भोपाल मध्य प्रदेश में बिजली चोरी का सबसे बड़ा और ‘नेक्स्ट लेवल’ एडवांस केंद्र बन चुका है। यहाँ के शातिर चोर बिजली कंपनी की हाईटेक स्मार्ट ग्रिड और डिजिटल मॉनिटरिंग तकनीक को धता बताकर संगठित रूप से बिजली चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। शहर में हर साल बिजली चोरी के औसतन 7,160 मामले सामने आ रहे हैं, जिससे बिजली कंपनी को प्रति वर्ष ₹26.80 करोड़ का भारी आर्थिक फटका लग रहा है। हाल ही में विजिलेंस टीमों द्वारा की गई जांच में कोलार, करोंद, अयोध्या बायपास और फार्महाउस बेल्ट में चौंकाने वाले संगठित तकनीकी अपराध पकड़े गए हैं।
शातिर चोरों ने सीधे पकड़े जाने से बचने के लिए पक्की दीवारों के भीतर और फर्श के नीचे अंडरग्राउंड केबल चुनवा रखी है। चेकिंग के दौरान एक परिसर में बिना मीटर, सीधे सर्विस लाइन से 6 एसी, 3 गीजर, 8 फ्रीजर और 41 पंखे अवैध रूप से चलते पाए गए। अधिकारियों के मुताबिक, तकनीकी जानकार लोग अब डिजिटल मीटर की पीसीबी (सर्किट), न्यूट्रल वायर और सेंसर से छेड़छाड़ कर रहे हैं, जो विभाग के लिए सिरदर्द बन चुका है।
चोरों की इस हाईटेक तकनीक में सेंध लगाने के लिए बिजली कंपनी की विजिलेंस टीम ने भी अब पारंपरिक तौर-तरीकों से तौबा कर ली है। जांच टीमों को अब सामान्य भौतिक चेकिंग के बजाय थर्मल स्कैनर (जो दीवारों के भीतर छिपी गर्म केबल को भांप लेता है), लोड एनालिसिस और डिजिटल डेटा मिलान जैसी आधुनिक तकनीकों का सहारा लेना पड़ रहा है।
