भोपाल। राजधानी में धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप अब पूरी तरह बदलने जा रहा है। करीब 21 एकड़ क्षेत्र में 100 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से आकार ले रहा ‘श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर’ न सिर्फ श्रद्धालुओं की आस्था को नया आयाम देगा, बल्कि भोपाल को धार्मिक पर्यटन के वैश्विक नक्शे पर भी स्थापित करेगा। सोमवार को सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने इस निर्माणाधीन महत्वाकांक्षी परियोजना का विस्तृत निरीक्षण किया।
उन्होंने अधिकारियों को दो-टूक निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर और उच्चतम गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए ताकि श्रद्धालुओं को जल्द से जल्द ये विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें। निरीक्षण के दौरान मंत्री सारंग ने कहा कि “विरासत भी और विकास भी” की अवधारणा पर तैयार हो रहा यह कॉरिडोर सदियों पुराने मंदिर की ऐतिहासिक गरिमा को अक्षुण्ण रखते हुए उसे एक भव्य और आधुनिक स्वरूप प्रदान करेगा। उज्जैन के ‘महाकाल लोक’ की तर्ज पर डिजाइन किए जा रहे इस भव्य प्रोजेक्ट के तहत पारंपरिक नागर शैली की वास्तुकला की अनूठी झलक देखने को मिलेगी।
पूरे कॉरिडोर के निर्माण में राजस्थान के बेशकीमती व्हाइट मार्बल (सफेद संगमरमर) का उपयोग किया जा रहा है, जहाँ दीवारों और स्तंभों पर ‘सुंदरकांड’ के प्रसंगों को बेहद जीवंत और कलात्मक रूप में उकेरा जाएगा, जिससे यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ एक उच्च आध्यात्मिक अनुभूति मिल सके। इस कॉरिडोर में सुगम दर्शन व्यवस्था, विशाल दर्शक दीर्घा, सर्वसुविधायुक्त पार्किंग और सार्वजनिक आयोजनों के लिए आधुनिक अधोसंरचना तैयार की जा रही है। परियोजना के अंतर्गत मंदिर के पास स्थित ऐतिहासिक दशहरा मैदान को भी अपग्रेड किया जा रहा है, जिसके खुले स्वरूप को बरकरार रखते हुए वहां एक विशाल मंच, दर्शक दीर्घा, रावण दहन स्थल और अन्य जनसुविधाएं विकसित की जाएंगी, साथ ही सुगम यातायात के लिए पूरे क्षेत्र में 15 मीटर चौड़ी चमचमाती कंक्रीट सड़क का निर्माण भी किया जा रहा है।
इस कॉरिडोर के बनने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी, क्योंकि दर्शक दीर्घा के निचले हिस्से में 100 से अधिक आधुनिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव है जिससे स्थानीय व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को विशेष रूप से हिदायत दी कि निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और नियमित श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि विस्थापन न्यूनतम हो और क्षेत्र की यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।
