चुनाव आयोग को विशेष पुनरीक्षण का अधिकार
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बिहार सहित अन्य राज्यों में चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग को SIR प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है और यह मनमाना फैसला नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए हैं कि संदिग्ध नागरिकता के आधार पर मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के नामों की जानकारी चार सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार को भेजी जाए। जानकारी के अनुसार बिहार में विधानसभा चुनाव से करीब 11 महीने पहले SIR प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी यह प्रक्रिया अपनाई गई। वहीं असम में स्पेशल रिवीजन (SR) कराया गया था।
बताया जा रहा है कि इन राज्यों में करीब 2.65 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए थे। इस प्रक्रिया के खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं।
चुनाव आयोग की दलील- मतदाता सूची की शुद्धता के लिए एसआईआर जरूरी
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि SIR नागरिकता निर्धारण की प्रक्रिया नहीं, बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने का अभ्यास है, ताकि केवल पात्र नागरिक ही सूची में रहें। आयोग ने कहा कि यह NRC जैसी कठोर जांच नहीं है। आयोग ने यह भी कहा कि यह कार्य चुनाव अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है, पुलिस द्वारा नहीं।
