नई दिल्ली/चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान गुरुवार को देश की राजधानी दिल्ली पहुंच गए हैं, जहां वे नीति आयोग की अत्यंत महत्वपूर्ण 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में हिस्सा लेंगे। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पंजाब राज्य से जुड़े कई गंभीर व लंबित मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाने के साथ-साथ अपनी सरकार की प्रमुख लोक-कल्याणकारी उपलब्धियों को भी देश के सामने रखेंगे।
मुख्यमंत्री मान इस मंच का उपयोग पंजाब में शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार और कौशल विकास जैसे बुनियादी क्षेत्रों में पिछले कुछ समय में किए गए क्रांतिकारी कार्यों और नीतिगत सुधारों का एक विस्तृत और प्रामाणिक ब्यौरा प्रस्तुत करने के लिए करेंगे। इसके साथ ही, राज्य सरकार द्वारा अब तक सरकारी और निजी क्षेत्रों में युवाओं को बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराए गए रोजगारों के वास्तविक आंकड़े भी नीति आयोग की बैठक की पटल पर रखे जाएंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बैठक में पंजाब सरकार कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए अपने आधुनिक कदमों और राज्य में औद्योगिक निवेश को बेहद आसान व पारदर्शी बनाने हेतु अपनाई गई ‘सिंगल विंडो’ जैसी प्रक्रियाओं को प्रमुखता से रेखांकित करेगी।
इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले ‘आम आदमी क्लीनिकों’ की जमीनी भूमिका तथा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बुनियादी सुधारों और ढांचागत उपलब्धियों को भी राष्ट्रीय स्तर पर साझा किया जाएगा। नीति आयोग की इस बैठक का एक मुख्य एजेंडा पंजाब के रुके हुए केंद्रीय फंडों का मुद्दा भी रहने वाला है। मुख्यमंत्री भगवंत मान केंद्र सरकार के पास लंबे समय से अटके पड़े राज्य के हक के पैसों और वित्तीय आकलनों को जारी करने की पुरजोर मांग करेंगे। साथ ही, पंजाब के विकास से जुड़े प्रमुख मसलों के स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार से सकारात्मक सहयोग और राज्य में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज की मांग भी रखी जा सकती है।
