रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में नक्सलवाद से मुक्त होते बस्तर के समग्र विकास का रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि दशकों तक हिंसा और पिछड़ेपन की पहचान रहे बस्तर को अब आर्थिक पुनरुत्थान, रोजगार, शिक्षा, कृषि, पर्यटन और तकनीक आधारित विकास का मॉडल बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बस्तर के आदिवासी परिवारों की आय बढ़ाने, दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, पर्यटन को उद्योग के रूप में विकसित करने तथा आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की व्यापक योजना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले तीन वर्षों में बस्तर के परिवारों की औसत मासिक आय 30 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में क्षेत्र के अधिकांश परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए खेती, पशुपालन, वन उपज आधारित गतिविधियों, छोटे उद्योगों और सरकारी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। बस्तर में डेयरी मॉडल को बढ़ावा देते हुए आदिवासी परिवारों को दुधारू पशु उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे महिलाओं और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत की सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर के लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की जा रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार होगा। वहीं सुरक्षा शिविरों को “सेवा डेरा” के रूप में विकसित कर ग्रामीणों को राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित 371 सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चित्रकोट और सिरपुर को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य जारी है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। बस्तर में वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
