चंडीगढ़। भगवंत मान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर प्रस्तावित ‘विकसित भारत शिक्षा अधिनियम विधेयक-2025’ पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने आशंका जताई है कि यह विधेयक उच्च शिक्षा को महंगा बना सकता है और आम परिवारों के बच्चों के लिए अवसर सीमित कर सकता है। मुख्यमंत्री मान ने अपने पत्र में कहा कि उच्च शिक्षा किसी किसान, मजदूर, कर्मचारी या छोटे दुकानदार के बच्चे के लिए अवसरों का माध्यम होनी चाहिए, न कि परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ। उनका कहना है कि देश का हर परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाकर आत्मनिर्भर बनाना चाहता है, इसलिए शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य अवसरों का विस्तार होना चाहिए।
भगवंत मान ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की अपेक्षा निर्णय लेने की शक्तियों के केंद्रीकरण पर अधिक केंद्रित दिखाई देता है। उन्होंने याद दिलाया कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए केंद्र और राज्यों दोनों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। उनके अनुसार यदि उच्च शिक्षा से जुड़े अधिकांश निर्णय दिल्ली में बैठी केंद्रीय संस्थाओं द्वारा लिए जाएंगे, तो राज्यों की नीतिगत और प्रशासनिक भूमिका कमजोर हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के प्रत्येक राज्य की परिस्थितियां और चुनौतियां अलग हैं। कहीं बेरोजगारी बड़ी समस्या है, तो कहीं कौशल विकास, औद्योगिक आवश्यकताओं या पलायन की चुनौती है। पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्यों को विशेष सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने तर्क दिया कि स्थानीय आवश्यकताओं को समझने और उनके अनुरूप शिक्षा नीतियां बनाने में राज्य सरकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में अत्यधिक केंद्रीकरण से राज्यों की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
