
हाल में ही हुए कलकत्ता डॉक्टर रैप मर्डर कांड, तथा देश में और भी कई जगहों पर सेक्स हिंसा का मुद्दा बहुत सुर्खियों में हैं और यही कारण है कि सर्वोच्च न्यायालय भी इस पर गंभीरता से विचार विमर्श करने पर मजबूर हो गया है और गहन रूप से इस विषय पर समाधान निकालने के लिये तत्पर हैं.
आइये देखते हैं कि भारत की स्वतंत्रता कुंडली, क्या कुछ संकेत दे रही है
15 अगस्त 1947 मध्यरात्रि को दिल्ली में कुंडली में वृषभ लग्न और कर्क राशि हैं तथा लग्न में राहु और तृतीय भाव में पांच ग्रहों का योग हैं, रोग भाव में गुरु के बाद केतु सप्तम भाव में स्थित हो कर सर्प दोष का निर्माण कर रहा है. चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में है जो अभीष्ट कार्य सिद्धि योग है परंतु ज्योतिष ग्रंथ फल दीपिका के अनुसार ऐसे जातक को अपने पिता का साथ कम मिलता है यही कारण है कि स्वतंत्रता के बाद देश को राष्ट्र पिता महात्मा गांधी का साथ ज्यादा समय तक नहीं मिल पाया.
लग्न अधिपति शुक्र और शनि पराक्रम भाव में आश्लेषा नक्षत्र में है तथा स्त्री कारक ग्रह चन्द्र भी साथ में हैं यही दुर्योग भारत में हो रहे महिलाओं पर अत्याचार का मुख्य कारण है. ज्ञात रहें कि आश्लेषा नक्षत्र का देवता सर्प है और जब भी लग्नेश इस नक्षत्र में होता है और वह भी पराक्रम भाव में तो जातक की काम वासना को कई कई गुना बढ़ा देता है तथा उनकी जीवन का मुख्य उद्देश्य ही सेक्स प्राप्ति बन कर रह जाता है. मेदिनी ज्योतिष के अनुसार शुक्र शनि का योग, छुपे हुए रिश्ते,अश्लील फिल्म,अवैध सेक्स संबंध और महिलाओं पर अत्याचार को भी दर्शाता है और यह भारत में अभी चरम पर है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से भारत की स्वतंत्रता कुंडली में चन्द्र की महादशा चल रही है. चन्द्र की 10 वर्षों की महादशा के बाद भी मंगल की महादशा सितंबर 2032 तक चलेगी और इस विषय पर कोई समाधान, या कोई नियम कानून व्यवस्था बन पायेंगी ऐसा नहीं लगता है.
शुक्रवार और पुष्य नक्षत्र से उत्पात आनंदादी योग भारत की स्वतंत्रता कुंडली में बन रहा हैं इसलिए देश में हर छोटी बड़ी बातों पर धरना प्रदर्शन, तोड़फोड और सड़कों पर उपद्रव पत्थर बाजी लगातार बढ़ती जा रही हैं. लग्न कुंडली में राहु, देश में नेताओं का किसी भी तरह सत्ता में रहना या आने की जोड़ तोड़ करना प्रदर्शित करता हैं पर केतु सप्तम भाव में स्थित है इसलिए पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार देश का प्रधान सेवक ज्यादातर वहीं बनेगा जो शादी या जीवनसाथी से दूर रहेगा या अविवाहित होगा.
द्वितीय परिवार भाव में मंगल और गुलिका का योग देश में विघटन कारी शक्तियों को बढ़ावा देता रहेगा तथा वृषभ लग्न के लिए बाधक ग्रह गुरू का रोजगार भाव को प्रबल दृष्टि से प्रभावित करना देश में रोजगार विस्तार के लिए सकारात्मक नहीं है.
सुभाष सक्सेना
ज्योतिष आचार्य
