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Monday, May 4, 2026
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ईएसआई अस्पताल सोनागिरी में अव्यवस्थाओं का बोलबाला, मरीजों को रोज झेलनी पड़ रही गंभीर परेशानियां

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भेल भोपाल।
राजधानी के सोनागिरी स्थित ईएसआई अस्पताल की अव्यवस्था के कारण हर दिन सैकड़ों मरीज इलाज के दौरान भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। श्रमिक वर्ग के लिए बनाए गए इस अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों की कमी, दवाओं की अनुपलब्धता एवं खराब सुविधाओं के चलते मरीजों को न केवल अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, बल्कि समय पर उचित चिकित्सा भी नहीं मिल पा रही है। अस्पताल की स्थिति पर श्रमिक कांग्रेस नेता दीपक गुप्ता ने गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा कि “राज्य और केंद्र सरकार के आपसी समन्वय की कमी का खामियाजा श्रमिकों को भुगतना पड़ रहा है। करोड़ों रुपए का अंशदान श्रमिकों के वेतन से हर महीने काटा जाता है, लेकिन बदले में उन्हें बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं मिल पातीं।

उन्होंने कहा कि अस्पताल में कई वर्षों से स्टाफ की गंभीर कमी बनी हुई है और प्रशासन के लगातार आश्वासनों के बावजूद स्थितियों में सुधार नहीं हो सका है। अस्पताल की प्रमुख समस्याएँ डॉक्टरों और नर्सों की कमी,अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बेहद कम है। कई विभागों में डॉक्टर उपलब्ध ही नहीं रहते, जिससे मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है या फिर उन्हें बाहर निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। दवाओं की अनुपलब्धता जरूरी दवाएं समय पर न मिलने की शिकायतें आम हैं। कई मरीज बताते हैं कि अस्पताल में दवाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें बाहर महंगे दामों पर दवाएं खरीदनी पड़ती हैं, जो आर्थिक रूप से पहले ही कमजोर श्रमिक परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डालता है।

सुविधाओं की खराब स्थिति अस्पताल की बुनियादी सुविधाएं जर्जर अवस्था में हैं। कई मशीनें महीनों से खराब पड़ी रहती हैं। वार्ड और ओपीडी क्षेत्रों में साफ-सफाई का उचित प्रबंध नहीं है। इन्फ्रास्ट्रक्चर में मरम्मत और आधुनिकीकरण की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही है। लंबा इंतजार (लॉन्ग वेटिंग) मरीजों को पंजीयन से लेकर इलाज तक हर चरण में लंबे इंतजार का सामना करना पड़ता है। भीड़ बढ़ने पर कई मरीज बिना इलाज के ही लौट जाते हैं।

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श्रमिकों में बढ़ रही नाराज़गी अस्पताल की लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए श्रमिक संगठनों में असंतोष बढ़ने लगा है। उनका कहना है कि जब श्रमिकों से हर माह नियमित अंशदान लिया जाता है, तो अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। श्रमिक संगठन जल्द ही अस्पताल व्यवस्थाओं में सुधार के लिए ज्ञापन सौंपने और आंदोलन की चेतावनी देने की तैयारी में हैं।

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