– आईआर बना मूक दर्शक, कारखाने का उठाना पड़ रहा है नुकसान
भोपाल
भेल भोपाल कारखाने में उत्पादन के पीक पीरियेड के चलते कुछ भेल कर्मी व नेता नुकसान पहुंचाने पर आमादा हैं। एक तो अक्सर यह डियूटी से नदारद रहते हैं उस पर कारखाने से बाहर कैसे निकले उसका रास्ता भी निकाल लेते हैं कुछ तो सुबह 7 बजे डियूटी आते हैं और 12.30 तक ब्लॉक में ही रह कर लंच के बाद थर्ड पंच कर (फिंगर) भेल के प्रवेश द्वार से बाहर निकल कर अपने निजी काम निपटाने में लगे रहते हैं और 3.30 बजे वापस डियूटी पर पहुंचने के लिये प्रवेश द्वार और अपने-अपने ब्लॉक में जाकर पंच कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं।
सूत्र बताते हैं कि इसे देखने की फुर्सत किसी अफसर को नहीं है या यह समझा जाये कि नेता और प्रभावशाली कर्मचारियों को खुश करने के लिये अपनी आंखें बंद किये हुये है रही बात सीआईएसएफ की तो प्रवेश द्वारों पर उनकी भूमिका भी संदिग्ध दिखाई दे रही है । बड़ी जिम्मेदारी उठाने वाला आईआर क्यों एक् शन नहीं ले रहा है इस पर सवालिया निशान लग गया है । उन्हें इस बात की भी चिन्ता नहीं है कि अल्प समय में ही भेल के नये मुखिया दिन-रात मेहनत कर उत्पादन लक्ष्य पाने की कोशिश कर रहे हैं । यदि जल्द ही इस पर एक् शन नहीं लिया तो भेल को लगातार आर्थिक नुकसान होता रहेगा।
