भोपाल
एक समय कस्तूरबा अस्पताल पूरे प्रदेश में नम्बर वन हुआ करता था जहां पर मुख्यमंत्री एवं गवर्नर तक अपना इलाज कराने आते थे। आज वही अस्पताल अपनी लाचारी पर बेबस है। जहां छोटे छोटे नर्सिंग होम अच्छी सेवायें प्रदान कर रहें है वहीं पर करोड़ों रूपये खर्च करने बाद भी भेल कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यह आरोप भेल इंटक के कोषाध्यक्ष राजेश शुक्ला ने लगाया है ।
उन्होंने बताया कि वर्तमान प्रबंधन स्वास्थ्य सुविधा को लेकर गम्भीर नहीं है। कम्पनी करोड़ों रूपये खर्च होने के बाद भी कर्मचारी स्वास्थ्य सुविधा को लेकर संतुष्ट नहीं दिख रहा है। प्रबंधन का पूरी जवाबदरी के साथ कर्मचारी का ध्यान रखना चाहिये आज कर्मचारी करोड़ों का उत्पादन देने के बाद भी पूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं ले पा रहा है।
उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में जहां बीमारियों का होना आम बात है ऐसी परिस्थिति में प्रतिनिधि यूनियनों ने नया फरमान जारी करवा दिया कि प्रथम पाली में भेल के रिटायर्ड कर्मचारियों का इलाज होगा और दूसरी पाली में मात्र दो घण्टे रेगुलर कर्मचारियों का ।
वहीं एक और दो माह से कस्तूरबा की नई बिल्डिंग से पुरानी बिल्डिंग तक का जाने रास्ता बंद है जिससे कर्मचारियों को अस्पताल की पूरी परिक्रमा करनी पड़ती है अगर मरीज गम्भीर बीमार हालत में है तो कैसे जाए और ऊपर से व्हील चेयर की हालत यह कि एक पहिया कहीं तो दूसरा पहिया कहीं और जा रहा है । बारिश के मौसम में कान, नाक गला की परेशानियां ज्यादा होती है ऐसे में इस कक्ष में तीन दिन से ताला डला हुआ है ।
यहां के एक डॉक्टर तीन दिन की छुट्टी पर है और आर्थोपेडिक डॉक्टर की सप्ताह में तीन दिन नाईट ड्यूटी लगा दी जाती है। उस पर कस्तूरबा के प्रभारी ध्यान देने की जरूरत ही नहीं समझ रहे हैं तो ऐसे में भेल कर्मचारी ठगा सा महसूस कर रहा है। भेल प्रवक्ता का कहना है कि अस्पताल में सभी सुविधायें मौजूद है । प्रायवेट नर्सिंग होम में गंभीर मरीजों को तुरंत भेजा जाता है । कर्मचारियों के हित मेंं स्वास्थ्य सुविधायें और भी बेहतर करने की कोशिश की जा रही है ।
