— मानित प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर रहे कर्मचारियों की नहीं ले रहा सुध
भेल भोपाल।
मध्यप्रदेश सरकार ने 28 जून 2023 को निगम से एमओयू करते हुए कर्मचारी राज्य बीमा भोपाल के चिकित्सालय को निगम के चिकित्सालय में परिवर्तित करते हुए‘जहाँ है, जैसे है’ की व्यवस्था के तहत निगम को दे दिया था। राज्य के कर्मचारियों को मानित प्रतिनियुक्ति पर कार्य करने के लिए स्थांतरित कर दिया था, लेकिन कर्मचारी इस व्यवस्था से परेशान हो रहे हैं और उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। इसके चलते एक कर्मचारी की पत्नि का इलाज न होने के कारण मृत्यु हो गई तो दूसरी ओर अस्पताल की एक महिला स्टाफ नर्स की बेटी का विवाह तक नहीं हो पा रहा है। वह शादी की तैयारी करे तो कैसे करे जब उसे अपनी ही पीएफ की राशि नहीं मिल रही है।
कर्मचारियों को निगम के कर्मचारियों की तरह न तो वेतन भत्ते ( डीए, एचआरए, टीए, अन्य भत्ते) दिए जा रहे हैं और न ही राज्य के कर्मचारियों की तरह डीए के एरियर का भुगतान किया जा रहा है। कर्मचारियों को उनके जीपीएफ का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है। पिछले छह महीने से कर्मचारियों जीपीएफ निकालने के लिए आवेदन कर रहे हैं, लेकिन उनको पीएफ का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है, जबकि कर्मचारियों को पीएफ अपने बीमारी के इलाज, बच्चों की शादी, जैसे आवशयक काम के लिए निकलता है। कर्मचारियों के पीएफ एवं अन्य कटौती भी समय पर जमा नहीं किए जाने से उन पर मिलने वाले ब्याज का भी नुकसान प्रतिमाह हो रहा है।
इन सब अव्यस्थाओं के चलते कई कर्मचारी मानित प्रतिनियुक्त पर काम नहीं करना चाहते है। उन्होंने राज्य सरकार को पत्र लिख कर कार्य करने की असहमति व्यक्त की है । कई कर्मचारियों का स्थानातंरण भी कर दिया गया है और कई कर्मचारियों की निगम ने पहले ही वापस कर दिया है, लेकिन कई कर्मचारियों को निगम द्वारा राज्य सरकार में वापस नहीं भेजा जा रहा है। ऐसे कर्मचारियों को सरकार द्वारा जारी किए गए आदेश के बाद भी वापस नहीं भेजा जा रहा है । कर्मचारी संगठनों द्वारा राज्य शासन और केंद्र शासन को विभिन्न मांगों और समस्याओं का निराकरण करने के लिए ज्ञापन भेजा गया है, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। श्रम मंत्रालय का निगम होने बावजूद श्रम कानून और नियमों को दरकिनार करते हुए मानित प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे कर्मचारियों को निगम एक चिकित्सालय में दो तरह के वेतन का भुगतान कर रहा है ।
जबकि श्रम मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियम के अनुसार कोई भी नियोक्ता वेतन देने में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं कर सकता है। राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के पीएफ, डीए के एरियर, समय मान के एरियर जैसे महत्वपूर्ण भुगतान करने के लिए कोई कार्यवाही कर रही है। कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित है और अपने वेतन एरियर और पीएफ को लेकर चिंतित है। जल्द ही कोई निर्णय राज्य सरकार द्वारा नहीं लिए जाने से कर्मचारियों को भारी नुकसान का सामना करना पड सकता है। दिवाली बिना पैसे के मनाना पड़ सकती है।
पत्नि की हो गई मौत, लेकिन नहीं मिला पीएफ
बदकिस्मती यह है कि जिस कंपनी में नौकरी कर रहे हैं वे कंपनी हमारा अपना पीएफ देने को तैयार नहीं है। चार माह पहले पीएफ निकालने के लिए अस्पताल में आवेदन दिया था, लेकिन पीएफ का पैसा नहीं मिला और एक सितंबर को मेरी पत्नि का इलाज नहीं हो पाने के कारण मौत हो गई। आज भी पीएफ का पैसा नहीं मिला।
श्यामलाल, कर्मचारी, राज्य बीमा चिकित्सालय, सोनागिरी
बेटी की शादी नहीं हो पा रही
22 नवंबर को मेरी बेटी की शादी होनी है, लेकिन डेढ महीने पहले पीएफ निकालने का आवेदन देने के बाद भी आज तक पीएफ की राशि नहीं आई है। इसके चलते मैं बेटी के विवाह की तैयारी नहीं कर पा रही हूं। विभाग काम तो करा है केंद्र का, बीमार होने के बाद भी डयूटी कर रही हूं।
श्यामवती बाई, स्टाफ नर्स, राज्य बीमा चिकित्सालय, सोनागिरी
इस संबंध में कुछ कर्मचारियों को ईपीएफ निकालने में कुछ परेशानियां हो रही हैं। इसके लिए ईएसआई डायरेक्टर इंदौर को पत्र लिखा है जल्दी ही निराकरण होगा।
शैलेष चौधरी, सुप्रीटेंडेंट, राज्य बीमा चिकित्सालय सोनागिरी, भेल
