भोपाल
सोमवार 8 अप्रैल 2024 को चंद्रमा के आरोही नोड पर पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई पड़ेगा यह साल का पहला ग्रहण होगा और नासा के मुताबिक, यह ग्रहण साल 2017 के बाद की सबसे लंबी खगोलीय घटना होगी. यह ग्रहण दक्षिण प्रशांत महासागर के ऊपर से शुरू होगा और यह उत्तर अमेरिका मेक्सिको और कनाडा से होकर गुजरेगा और यह ग्रहण भारत में दिखाई नही देगा । मीन राशि और रेवती नक्षत्र पर पड़ रहे पूर्ण सूर्यग्रहण के पहले ही आगामी 15 मार्च से मंगल गोचर में कुम्भ राशि में प्रवेश कर शनि शुक्र से युति करेंगे, मैदिनी ज्योतिष में कुंभ राशि को धार्मिक स्थानों की राशि भी माना जाता है तथा मंगल और शनि की युति से द्वंद्व योग बनता है, अर्थात एक बार फिर देश के अन्दर मार्च के अंत से चुनाव तक धार्मिक विवाद के ज्योतिष योग बनते प्रतीत हो रहे हैं।
पश्चिम बंगाल की प्रभाव राशि मिथुन से नवम भाव में पड रहे इस योग से चुनावी प्रक्रिया में अनावश्यक हिंसक घटनाओं में वृद्धि होगी तथा नेताओं के बीच भाषा की मर्यादा निम्न स्तर पर पहुंच जाएगी। भारत की स्वतंत्रता चंद्र कुंडली से नवमें भाव में ग्रहण राशि देश की न्यायपालिका द्वारा कुछ फैसले सरकार के लिये कठिन स्थिति पैदा कर सकते हैं और यह भी सम्भव है कि इलेक्टोरल बॉन्ड का मुद्दा या किसी अन्य वित्तीय धोखाधड़ी का मामला चुनाव से पहले फिर सुर्खियों में आ सकता है।
भारत की स्वतंत्रता कुंडली के अनुसार चंद्र महादशा में शुक्र का अंतरा चल रहा है औऱ 31 मार्च से गोचर में यह ग्रहण राशि में प्रवेश कर 24 अप्रैल तक रहेगा, यह कुंडली का षष्ठम भाव या रोग भाव का स्वामी ग्रहण योग कारण देश के किसी नामी गिरामी नेता के चुनाव प्रचार के दौरान रोग ग्रस्त होने के ज्योतिष योग हैं। ग्रहण राशि मीन भारत कुंडली के लाभ स्थान या आय स्थान पर है और लग्नेश शुक्र भी ग्रहण योग के चलते वित्तीय बाजारों में चुनाव से पहले बहुत अस्थिरता रहने के आसार हैं।
यह ग्रहण अमेरिका में समग्रता के मार्ग पर रहने वाले लगभग 30 मिलियन लोगों को दिखाई देगा, जिसमें अमेरिका का एक लंबा विस्तार भी शामिल है. अमेरिका में भी चुनाव के मद्देनजर यह वहां की राजनीति में नई दिशा दे सकता है। अभी तक अमेरिका में ट्रम्प और बाइडन की ही चर्चा है पर यह संभावना है कि रिपब्लिकन पार्टी चुनाव जीतने के लिये,ट्रम्प की जगह किसी और को नोमिनेट कर सकती हैं। हालाँकि ग्रहण की ऊर्जा अधिकतर ग्रहण से दो सप्ताह पहले या बाद तक बनी रहती है, लेकिन घटनाओं पर प्रभाव 3 महीने पहले और बाद या फिर अगले ग्रहण तक भी बना रहता है।
सुभाष सक्सेना,ज्योतिषाचार्य
