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Wednesday, May 27, 2026
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ससुर रहे मुख्यमंत्री, पहली बार मंत्री बनीं कृष्णा गौर, जानिए कैसा रहा है राजनीतिक सफर

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— बीते चुनाव में एक लाख से अधिक मतों से जीत दर्ज कर विधानसभा में पहुंची हैं कृष्णा गौर
— ऐसे बनाए रिशते, बुजुर्गों से बहू का, युवक-युवतियों से भाभी, दीदी का बनाया रिश्ता
— वर्ष-2009 से 2014 तक रहीं भोपाल की महापौर
— मप्र राज्य पर्यटन निगम की अध्यक्ष के पद पर भी रहीं
— गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में जनता के बीच लगातार सक्रिय रहती हैं कृष्णा गौर
— छोटे हों या बडे कार्यक्रम या किसी का जन्म दिन, वे पहुंचती जरूरी हैं
— महिलाओं में बेहद लोकप्रिय हैं कृष्णा गौर, आमतौर पर एक—एक कार्यकर्ता को नाम से करती हैं संबोधित, जो एक नेता के लिए होता है मुश्किल काम

भोपाल।

मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री (स्वर्गीय) बाबूलाल गौर की पुत्रवधू कृष्णा गौर अपने ससुर की विरासत को बखूबी आगे बढ़ा रही हैं। वह लगातार दूसरी बार विधायक चुनी गई हैं। उन्होंने भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र से पहली बार चुनाव वर्ष-2018 में जीता। तब उन्होंने कांग्रेस के गिरीश शर्मा 46 को 359 मतों से हराया था। वहीं इसी वर्ष बीते माह हुए विधानसभा चुनाव में इसी सीट से कृष्णा गौर रिकार्ड एक लाख छह हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज कर विधानसभा में पहुंची हैं। इसका लाभ कृष्णा गौर को मिला है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शामिल किया है।

महिलाओं के बीच मजबूत पकड
उन्होंने गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में महिलाओं के बीच अच्छी पकड़ बनाई है। भेल कालेज का निर्माण हो या फिर आनंद नगर में अस्पताल का निर्माण कराने सहित सड़क, स्ट्रीट लाइट, पार्कों का निर्माण उन्होंने विधायक रहते हुए कराया। मतदाताओं के बीच बेहतर पैठ होने से उन्होंने ने रिकार्ड तोड़ जीत दर्ज की है। इससे पहले वर्ष-2009 से 2014 तक भोपाल की महापौर रहीं। 2005 में मप्र राज्य पर्यटन निगम की अध्यक्ष का पद भी संभाला।

बहू, भाभी, दीदी का घर-घर रिश्ता बनाया
पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौर का दशकों तक गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र पर वर्चस्व रहा। वर्ष-2018 में उनकी विरासत पुत्रवधु कृष्णा गौर ने विधायक का चुनाव जीतकर संभालीं। शुरुआत में लोग कहते थे कि कृष्णा गौर अपनी पैठ बाबूलाल गौर जैसी नहीं बना पाएंगी, क्योंकि उन्हें राजनीति विरासत में मिली हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वो लगातार सक्रिय रहीं। बुजुर्गों से बहू का रिश्ता जोड़ा, युवक-युवतियों से भाभी, दीदी का भी रिश्ता बनाया। सुबह से 10 से शाम छह बजे तक वो लोगों से मिलती हैं। विशेष तौर पर महिलाओं के बीच उनकी बहुत अच्छी पैठ है।

106668 लाख मतों से जीतीं कृष्णा गौर, प्रदेश में दूसरी सबसे बड़ी जीत
गोविंदपुरा क्षेत्र में बाबूलाल गौर की आठ बार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए कृष्णा गौर ने दर्ज की लगातार दूसरी जीत। गौर परिवार की इस पारंपरिक सीट पर इस बार कांग्रेस मैदान में मजबूती से खड़ी भी नहीं हो पाई।

जिले की सात विधानसभा सीटों में भाजपा का सबसे पुराना गढ़ गोविंदपुरा एक बार फिर पूरी ताकत से उभरकर सामने आया है। देश की नवरत्न कंपनी भेल और गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र में श्रमिक नेता से उभरकर मुख्यमंत्री तक पहुंचने वाले बाबूलाल गौर ने रिकार्ड आठ बार विजयश्री हासिल करके जो मजबूत नींव बनाई थी, उसे उनकी बहू कृष्णा गौर ने न केवल बरकरार रखा, बल्कि एक लाख से अधिक मतों से जीतकर इसकी मजबूती में कोई कमी नहीं आने दी है।

पांच दशक से भाजपा का है कब्जा
इस सीट पर जिले में सबसे ज्यादा तीन लाख 93 हजार 213 मतदाता हैं, इस मतदान में दो लाख 47 हजार 854 मतदाताओं अर्थात 63.03 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था। इस सीट पर पांच दशकों से भाजपा की मजबूत पकड़ है। गौर परिवार की सीट पर इस बार कांग्रेस मैदान में मजबूती से खड़ी भी नहीं हो पाई। कृष्णा गौर की टक्कर में कांग्रेस प्रत्याशी रवींद्र साहू झूमरवाला की अपने क्षेत्र में पहले से सक्रियता नहीं रही थी। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने क्षेत्र को नापने की कोशिश तो की, लेकिन बड़े इलाके में सब तक पहुंच नहीं पाए।

क्षेत्र में अच्छी पकड़
राजधानी की महापौर भी रह चुकी कृष्णा गौर की अपने विधानसभा क्षेत्र में गजब की पकड़ है। छोटे-छोटे आयोजनों में बुलाए जाने पर भी वे उपस्थिति जरूर दर्ज कराती हैं। महिलाओं से उनका बहनापा है तो पुरुष मतदाता की बहन, बेटी, बुआ बनकर रिश्ता जोड़ लेती हैं। एक बार के महापौर रहने के बाद विधानसभा चुनावों में लगातार दूसरी जीत दर्ज करने से वरिष्ठता और महिला कोटे से मंत्री पद की दावेदार भी बन गई हैं।

भोपाल जिले में सबसे बड़ी जीत
जिले की गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी कृष्णा गौर ने एक लाख छह हजार 668 मतों से प्रदेश में दूसरी सबसे बड़ी जीत हासिल की है।जबकि भोपाल जिले में पहली सबसे बड़ी जीत उन्होंने प्राप्त की है। वहीं हुजूर से रामेश्वर शर्मा ने भोपाल जिले में दूसरी बड़ी जीत कुल 97 हजार 910 मतों से प्राप्त की है। पिछले 2018 चुनाव की अपेक्षा कृष्णा गौर को 60 हजार 309 और रामेश्वर शर्मा को 82 हजार 185 अधिक मत मिले हैं।

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