– सूर्य की राशि परिवर्तन के समय बनने वाली कुंडली को संक्रांति कुंडली कहते हैं
सूर्य के बारह राशियों में प्रवेश पर बनी कुंडली से अगले तीस दिनों का फलकथन जाना जाता है पर सूर्य का मकर राशि और कर्क राशि में प्रवेश विशेष महत्व रखता है।मकर राशि प्रवेश पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में ही होता है जो सूर्य का ही नक्षत्र है पर मकर राशि शत्रु गृह शनि की है इसलिए इस संक्रांति पर मंत्र पूजा दया दान औऱ संकल्प पर ध्यान देना शुभ माना जाता है.
जनवरी 15 को रात में 2 बजकर 44 मिनट पर बनी कुंडली, तुला लग्न औऱ चंद्र शतभिषा नक्षत्र और कुम्भ राशि में है।प्रश्नमार्ग के अनुसार संक्राति कुंडली और शतभिषा नक्षत्र कुधान्य और वर्षा के संकेत देती हैं अर्थात देश में रबी फसल बहुत अच्छी होगी और किसानों की खुशहाली बढ़ेगी,लेकिनउत्तर भारत में कुछ दिनों में वर्षा होने का योग भी बन सकता है ।
धर्म का कारक ग्रह गुरू लग्न को सातवीं दृष्टि से देख रहा है जो देश में राम मंदिर निर्माण को लेकर जनता के उल्लास की वृद्धि करेगा हालांकि लग्र पति शुक्र का द्वितीय भाव में स्थित होना कुछ विघ्न आदि को भी दर्शाता है
चतुर्थ और पंचम भाव स्वामी शनि की चंद्र से युति सरकार द्वारा किसानों और महिलाओं के लिए कुछ विशेष घोषणाएं अंतरिम बजट के दौरान आ सकती हैं और तृतीय भाव में मंगल और बुध की युति नौजवानो के लिए विशेष प्रावधान किए जाने की संभावना भी दिखा रहा है। चुनाव आयोग के द्वारा अगले लोक सभा चुनाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते है परंतु चुनाव फंडिंग और बॉन्ड को लेकर विवाद तेज हो सकता है.
सुभाष सक्सेना
ज्योतिष आचार्य
