34.3 C
London
Tuesday, May 26, 2026
Homeभेल न्यूज़अमरावद खुर्द में ध्यान विज्ञान परमार्थ संस्थान द्वारा सुनिए कथा रघुनाथ की...

अमरावद खुर्द में ध्यान विज्ञान परमार्थ संस्थान द्वारा सुनिए कथा रघुनाथ की का आयोजन

Published on

प्रेम में हमेशा मिलेंगे तो दो, लेकिन रहेगा एक, एक अपना अस्तित्व ही समाप्त कर देता है

भोपाल.

अवधपुरी वायु रॉयल एनक्लेव, ईडन गार्डन गेट वेदवती ग्राउंड अमरावद खुर्द में चल रही श्रीराम कथा के छठवे दिन अंतरराष्ट्रीय कथाकार, समाज सुधारक आचार्य मनोज अवस्थी महाराज ने भरत मिलाप का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब देवराज इंद्र ने गुरु बृहस्पति से यह कहा कि भरत और राम जी मिलने ना पाएं। क्योंकि भरत राम से मिलेंगे तो वह राम को अयोध्या लौटने को कहेंगे और भरत जी की बात राम जी जरूर मानेंगे। इस बात पर गुरु बृहस्पति ने कहा कि राम जी वही करेंगे जो भरत कहेंगे, लेकिन भरत वही कहेंगे जो राम जी चाहेंगे।

राम और भरत को जब तक हम अलग-अलग निगाहों से देखते रहेंगे, तब तक राम और भरत के चरित्र को हम नहीं समझ सकते। प्रेम में हमेशा मिलेंगे तो दो, लेकिन रहेगा एक। एक अपना अस्तित्व ही समाप्त कर देता है। महाराज ने बताया कि प्रेम का भाव चाहे वह परमात्मा से हो या संसार से हो उसमें एकात्म भाव होता है, जिसमें हमेशा मिलते तो दो हैं, लेकिन हमेशा रहता एक है।

भरत ने गुरु वशिष्ठ से कहा कि गुरु जी राम अयोध्या लौट जाएं, तो मैं सारी जिंदगी जंगल में रहने के लिए तैयार हूं, क्योंकि प्रेम अपने प्रेमाश्वत का सुख देखता है, प्रेमाश्वत को खुशी देना चाहता है। जब राम और भरत चित्रकूट में मिले तो, उस प्रीति का वर्णन कवियों के लिए लिखना, सुनना और कहना संभव नहीं है। राम और भरत का मिलन आत्मा से परमात्मा का मिलन जैसा है, जो एक दूसरे में मिलकर एक दूसरे में समा जाते हैं और संसार केवल देखता ही रह जाता है।

महाराज ने बताया कि राम ने अपनी चरण पादुका भरत को दे दी, जिसे लेकर भरत अयोध्या लौट आए। अयोध्या के कार्यवाहक राजा के रूप में नंदीग्राम में रहकर अयोध्या की सेवा की। महाराज ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास को भी राम जी मिले तो केवल भरत जी की वजह से ही मिले। आगे आरण्य कांड का वर्णन करते हुए महाराज ने सुनाया कि जब श्री राम और आगे बढ़े तो दंडक वन में साधुओं की अस्थियों का ढेर देखने को मिला, जिस पर राम जी को क्रोध आ गया और उन्होंने प्रतिज्ञा ली कि मैं इस धरती को निशाचारों से विहीन कर दूंगा।

रावण की बहन सूर्पनखा अपनी समीक्षा करने पहुंची और राम जी से कहा कि आप जैसा पुरुष और मेरे जैसी नारी नहीं है। इस पर लक्ष्मण ने सूर्पनखा को नाक-कान विहीन कर दिया। इसके बाद राम जी ने खरदूषण, तृष्णा का उद्धार किया। इसके बाद रावण द्वारा माता जानकी का हरण करके लंका ले जाने की कथा सुनाई। कथा में मुख्य यजमान सरिता सिंह (खुशबू) उदय प्रताप सिंह हैं।

Latest articles

नौतपा के दो रंग- एक तरफ भीषण गर्मी तो दूसरी आंधी और बूंदाबांदी, 45 शहरों में लू का अलर्ट

भोपाल। मध्यप्रदेश में इस बार नौतपा की शुरुआत अलग अंदाज में हुई है। एक...

भेल थ्रिफ्ट सोसायटी का प्रतिभा सम्मान समारोह 31 मई को, उत्कृष्ट छात्र और कर्मचारी होंगे सम्मानित

भोपाल। बीएचईई थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी द्वारा वर्ष 2024-25 सत्र हेतु 'प्रतिभा सम्मान...

छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से की सौजन्य भेंट

रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को देश की राजधानी...

गंगा दशहरा पर भरतपुर से ‘वंदे गंगाजल संरक्षण जन अभियान-2026’ का आगाज, सीएम ने किया जल पूजन

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को गंगा दशहरा के पावन पर्व पर भरतपुर...

More like this

भेल थ्रिफ्ट सोसायटी का प्रतिभा सम्मान समारोह 31 मई को, उत्कृष्ट छात्र और कर्मचारी होंगे सम्मानित

भोपाल। बीएचईई थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी द्वारा वर्ष 2024-25 सत्र हेतु 'प्रतिभा सम्मान...

बीएचईएल जूनियर एग्जीक्यूटिव क्लब का 60वां वार्षिक सम्मेलन, स्मारिका ‘उड़ान’ का हुआ विमोचन

मुख्य अतिथि कार्यपालक निदेशक प्रदीप कुमार उपाध्याय का हुआ सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा...

बीएचईएल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 39 अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से तबादला

नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की अग्रणी कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) कॉर्पोरेट कार्यालय...