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Tuesday, May 26, 2026
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अमरावद खुर्द में ध्यान विज्ञान परमार्थ संस्थान द्वारा सुनिए कथा रघुनाथ की

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– भाई और भाई का रिश्ता कैसा होता है तो केवल भरत का चरित्र हमें सिखा सकता है

भोपाल

अवधपुरी वायु रॉयल एनक्लेव, ईडन गार्डन गेट वेदवती ग्राउंड अमरावद खुर्द में चल रही श्रीराम कथा के छटवें दिवस अंतरराष्ट्रीय कथाकार, समाज सुधारक आचार्य मनोज अवस्थी महाराज ने श्री राम कथा के मार्मिक प्रसंगों को सुनाया। महाराज ने राम के वन यात्रा के पहले पड़ाव प्रयागराज में भारद्वाज मुनि से राम जी की भेंट के प्रसंग को सुनाया और बताया कि राम जी ने भारद्वाज जी से पूछा कि हम किस मार्ग पर जाएं। भारद्वाज जी परमार्थ पद के सच्चे पथिक हैं, इसलिए राम जी ने परमार्थ पद पर जाने के लिए भारद्वाज जी से रास्ता पूछा।

आगे श्री राम जी ने वाल्मीकि ऋषि से भेंट की और वाल्मीकि जी ने राम जी को रहने के लिए 14 स्थान बताए। अयोध्यापुरी का वर्णन करते हुए महाराज ने बताया कि दशरथ जी महाराज ने राम जी के वियोग में अपने प्राण त्याग दिए। तब भरत जी के पास सूचना गई और भारत अयोध्या आए। जब अयोध्यावासियों औऱ मंत्रियों ने भारत से राज्य पद लेने के लिए कहा तो भारत ने बड़ी अच्छी बात कही कि मैं पद का लोभी व्यक्ति हूं, मुझे पद चाहिए है, लेकिन अयोध्या का राज्य पद नहीं।

मुझे भगवान का चरण पद चाहिए, क्योंकि अयोध्या का राज्य पद एक है और भगवान के चरण पद दो हैं और जिसको दो मिलता हो वह एक में समझौता नहीं करेगा। अयोध्या का राज्य पद का पद है और राम जी का चरण पद स्वयं भगवान का पद है। महाराज ने बताया कि आज जहां भाई-भाई के बीच दो फीट जमीन के पीछे मुकदमे हो रहे हैं, लड़ाइयां होती हैं। क्लेश हो रहे हैं, वहां आज संपूर्ण भारतवर्ष ही नहीं संपूर्ण राष्ट्र को भरत से प्रेरणा लेनी चाहिए।

भरत से यह सीखना चाहिए कि कैसे जहां चार भाई है और अयोध्या जैसा स्वर्ग से भी सुंदर राज्य है और चारों भाइयों में से कोई भी अयोध्या का राजा बनने को तैयार नहीं है। प्रेम, मर्यादा, संस्कार, भारतीय संस्कृति, भारतीय मूल्य अगर सीखना है और जानना है कि भाई और भाई का रिश्ता कैसा होता है तो केवल भरत का चरित्र हमें सिखा सकता है। भरत की त्याग, तपस्या, प्रेम, सद्भाव, समर्पण की साक्षात प्रतिमूर्ति है। सारा संसार राम जी को जपता है, लेकिन राम जी भरत जी को जपते हैं। कथा रोजाना दोपहर 2 बजे से की जा रही है। कथा में मुख्य यजमान सरिता सिंह (खुशबू) उदय प्रताप सिंह हैं। कथा सुनने विष्णु राने राष्ट्रीय अध्यक्ष,अखिल भारतीय क्षत्रिय लोणारी कुनबी समाज, राम मनोहर सिंह सेंगर और श्रद्धालु मौजूद रहे।

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