भोपाल
भेल इलाके के सोनागिरी पर स्थित बीमा अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधा तो दूर मूलभूत सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। आलम यह है कि अस्पताल में ना तो स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं और ना ही जांच के लिए अपग्रेडेड मेडिकल इंक्यूपमेंट की उपलब्ध्ता। इतना ही नहीं अस्पताल में अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे की भी सुविधा नहीं है। मसलन अस्पताल प्रबंधन को हर महीने लाखों रुपये एक्स-रे की फिल्म खरीदी के नाम पर खर्च करने पड़ रहे हैं जबकि डिजिटल एक्स-रे की सुविधा के जरिए इस लागत को बचाया जा सकता है। ऐसे में अस्पताल के मैनेजमेंट को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
गौरतलब है कि सोनागिरी स्थित बीमा अस्पताल का संचालन ईएसआईसी (एम्प्लोई स्टेट इंश्योरेंश कॉर्पोरेशन) के द्वारा किया जा रहा है। इसके संचालन के पीछे उदेश्य ये था कि संगठित और असंठित क्षेत्र के श्रमिकों को बीमा के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ मुहैया कराया जाएगा है। इसके लिए ईएसआईसी द्वारा बकायदा मूल वेतन का 4 प्रतिशत बीमित राशि भी वसूली जा रही है,लेकिन सुविधाएं भगवान भरासे ही चल रही हैं।
बीमा अस्पताल में सात साल पहले नॉन माडूलेटेड एक्स-रे मशीन इंस्टॉल की गई थी। तब भी तकनीकी टीम ने डिजिटल एक्स-रे मशीन लगाए जाने का सुझाव दिया था,लेकिन उस समय प्रबंधन ने इसे नजर अंदाज करते हुए मनमाने तरीके से मशीन क्रय की थी। यदि डिजिटल एक्स-रे मशीन उस समय लगाई गई होती तो आज मरीजों को एक्स-रे की बेहतर सुविधा मिल रही होती और उन्हें जांच रिपोर्ट के लिए भटकना नहीं पड़ता। क्योंकि कई बार फिल्म नहीं होने पर की दशा में भी एक्स-रे नहीं हो पाते हैं। रोजाना 50 से ज्यादा एक्स-रे होते हैं। बीमा अस्पताल पूरी तरह से निजी अस्पतालों पर निर्भर है इसमें सुधार कब होगा। एक्स-रे की पुरानी मशीन से ही काम चलाया जा रहा है साथ ही सोनोग्राफी मशीन व पेथोलॉजी का भी अभाव बना हुआ है ।
