राजगढ।
हिंदी साहित्य भारती (अंतरराष्ट्रीय) इकाई मध्य भारत प्रान्त के तत्वाधान में विभिन्न जिलों के साहित्यकारों की उपस्थिति में अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में संगोष्ठी का आयोजन सनाढ्य संस्कार भवन दुर्गा कॉलोनी गुना में संपन्न हुआ। अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा व राष्ट्र कवि श्री श्री कृष्ण सरल के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हिन्दी साहित्य भारती के प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र शुक्ल बालाघाट, केंद्रीय उपाध्यक्ष डॉक्टर रमा सिंह गुना, दिनेश बिरथरे प्रदेश महामंत्री गुना, एसके राजोरिया अध्यक्ष मध्य भारत प्रांत, प्रेम सिंह प्रेम प्रांत उपाध्यक्ष, सुनील शर्मा चीनी जिलाध्यक्ष गुना मंचासीन रहे।
संगोष्ठी के प्रथम सत्र में हिन्दी साहित्य भारती के ध्येय गीत की प्रस्तुति के साथ सांगठनिक चर्चा संपन्न हुई। जिसमें हिंदी साहित्य भारती के विश्व व्यापी स्वरूप को सदन में राजेंद्र शुक्ल ने रखा। उन्होंने बताया कि आज हिन्दी साहित्य भारती सम्पूर्ण देश में विस्तार ले चुकी है,साथ ही विश्व के 36 देशों में सक्रिय इकाइयों के माध्यम से हिंदी की सेवा में लगी हैं। अध्यक्ष (अंतरराष्ट्रीय) डॉक्टर रविन्द्र शुक्ल मॉरिशस में हिंदी साहित्य भारती के विस्तार हेतु प्रवास पर हैं।
केंद्रीय उपाध्यक्ष डॉ रमा सिंह ने साहित्य भारती के ध्येय, उद्देश्य और क्षेत्र के स्वरूप को बताया। डॉ रविन्द्र शुक्ल ने सुदूर देश मॉरिशस से तरङ्ग संचार माध्यम से संगोष्ठी को संबोधित कर विस्तार हेतु मार्गदर्शन दिया। इसके पश्चात प्रदेश महामंत्री दिनेश बिरथरे ने गत वर्ष का मध्य भारत प्रांत का कार्यवृत्त प्रस्तुत किया जिसमें 14 जिलों की कार्यकारिणी और उनके द्वारा वर्ष भर किए गए कार्यों का विवरण समाहित था। सत्र के अंत में नव निर्वाचित जिला इकाई, प्रांत इकाई व प्रदेश इकाई कार्यकारिणी के दायित्ववानों को सम्मानित किया गया। स्वल्पाहार के उपरांत द्वितीय सत्र में दोपहर से आरंभ हुई कवि गोष्ठी में गुना,अशोकनगर, राजगढ़, आरोन,व्यावरा बीनागंज, कुंभराज से आए कवियों ने विभिन्न विधाओं में प्रासंगिक एवं श्रेष्ठ रचनाएं प्रस्तुत कर समां बांधे रखा।
कवि गोष्ठी का संचालन शायर प्रेम सिंह प्रेम ने किया। प्रथम सत्र का संचालन सुनील शर्मा चीनी ने किया और आभार मध्य भारत प्रान्त के अध्यक्ष एसके राजौरिया ने व्यक्त किया।कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से प्रारंभ होकर काव्य गोष्ठी रात 8 बजे तक चली, जिसमें शताधिक साहित्य प्रेमियों, वरिष्ठ नागरिकों ने सहभागिता की व नगर तथा दूरस्थ अंचल से आये कवियों की कविताओं का आनन्द लिया।
