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Saturday, May 30, 2026
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बीएचईएल को-ऑपरेटिव सोसायटी का मामला पहुंचा थाने

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-बरखेड़ा सुपरबाजार के संचालक ने की शिकायत

भोपाल

जिस उद्देश्य से बीएचईएल इम्प्लाइज को-ऑपरेटिव सोसायटी का गठन किया गया था। आज वह सोसायटी अपने कामों पर खरी नहीं उतर पा रही है। जिन बीएचईएल के कर्मचारी और रिटायर्ड कर्मचारी ने जिन हाथों में सत्ता सौंपी थी उससे ही यह उम्मीद नहीं थी कि चंद साल में ही वह उसे बरबादी के कगार पर लाकर खड़ा कर देंगे। आज वित्तीय स्थिति पूरी तरह डामाडोल है। दुकानों का संचालन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है सोसायटी कर्मचारी व ठेका श्रमिकों को वेतन के लाले पड़े है। भेल प्रबंधन कभी भी काम बंद कर सकता है।

चाहे पिपलानी की तेल घानी हो या फिर बरखेड़ा का सुपर बाजार सब निजी हाथों में सौंपकर बरबाद कर चुके हैं। सिर्फ दम बची है तो इंडेन गैस में। 600 से ज्यादा ठेका श्रमिक भेल कारखाने में काम कर रहे हैं जिन्हे ंसमय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। उनकी ग्रेजुएटी और पीएफ का अता पता नहीं है। आवासों को बिजली बिल व रेंट कहां जा रहा है इसको लेकर मजदूर परेशान है। जीएसटी का मामला किसी से छिपा नहीं है। आरटीआई मांगने पर सही जानकारी तक नहीं मिल पा रही है। हाल ही में बरखेड़ा स्थित एक सुपरबाजार विजय मार्केट में अनुबंध पर दे डाला। वह भी तीन फीसदी के लाभ पर।

खास बात यह है कि जिस निजी हाथों को संस्था ने सौंपा था। उसकी राशि संस्था के खाते में आती। मेसर्स विमल इंटरप्राइजेस को संस्था के कर्ताधर्ताओं ने आज तक राशि का भुगतान ही नहीं किया। बल्कि उलटा नोटिस देना शुरू कर दिया। प्रो. देवेंद्र सिंह चीमा ने इस मामले की शिकायत थाना गोविंदपुरा मेें दर्ज करते हुए संस्था के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर डाली। श्री चीमा का कहना है कि संस्था के कर्ता-धर्ताओं ने सुपरबाजार का ताला तोड़कर सभी सामान तथा जरूरी दस्तावेज बिना सूचना के निकाल लिए।

मामला तेल घानी का
इस संस्था में मामले एक नहीं अनेक है। बीएचईएल में इसे कमीशन की दर पर काम दिया है। यही नहीं कही दुकान भी कारोबार करने के लिए मुुहैया कराई है लेकिन इस संस्था के कर्ताधर्ता उलटी गंगा बहा रहे है। पहले सुपरबाजार फिर काफी हाउस और तेल घानी का व्यवसाय भी निजी हाथों में सौंप दिया। मनमाने दर पर खाद्य व सोसायटी के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए काम दे रहे है। इसमें सोसायटी का भी पैसा फंसा हुआ है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में कोई फैसला होता ही नहीं है। सिर्फ एक कर्ताधर्ता की मनमानी में पूरी संस्था को बरबादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। नए-नए बिजनेस का सपना दिखाकर तेल घानी का कारोबार शुरू कर दिया। यहां भी सोसायटी के कुछ लोग अपनी पार्टनरशीप में काम कर रहे है।

संस्था में गंभीर अनियमितताएं की जा रही है। बिना संचालक को जानकारी दिए बिना निजी हाथों सौंपी जा रही है। ऑडिट नहीं हो रहा है। अध्यक्ष अकेले ही संस्था का संचालन कर रहे हैं। सहकारिता विभाग भेल प्रशासन और खाद्य विभाग का अमला कार्रवाई करें तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
-आरएस ठाकुर
संस्था डायरेक्टर

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