– गोविंदपुरा टीआरटी हो गया उजाड़, हो रहे है अवैध कब्जे
भोपाल।
यूं तो भेल प्रशासन के पास दो हजार एकड़ से ज्यादा जमीन अतिशेष पड़ी हैं। इसकी रखवाली भेल प्रशासन का बेदखली अमला और निजी गार्ड एजेंसियां कर रही हैं। नगर प्रशासन विभाग कम अमला होने के बाद भी अतिक्रमण रोकने की कार्यवाही समय-समय पर कर रहा है लेकिन जिला और पुलिस प्रशासन का पूरा सहयोग न मिलने के कारण अतिक्रमणकारी पैर पसारने से बाज नहीं आ रहे हैं।
अब तो कुछ रसूखदार इस जमीन पर निगाह गढ़ाए हुए हैं। कब यह जमीन किसके हाथ लग जाए कहां नहीं जा सकता। अकेले गोविंदपुरा क्षेत्र की बात करें तो भेल प्रशासन ने यहां के सैंकड़ों आवासों को नेस्तनाबूद कर चुका है। थोड़े बहुत आवास और दुकान ही बची हैं। एक समय ऐसा था जब भेल की इस जगह लाखों की राजस्व वसूली करता था लेकिन इन सब पर ध्यान न देते हुए इस क्षेत्र को पूरी तरह उजाड़ कर रख दिया है। खंडहर मकान खुद कर रहे हैं यह सब बयां। सडक़ें उखड़ी हुई हैं। आवाजाही भी न के बराबर है। गोविंदपुरा स्टॉप के पास टीआरटी क्वार्टर्स पूरी तरह तोड़ दिये गये हैं। रायसेन रोड़ मुख्य मार्ग का टीआरटी बस स्टॉप पूरी तरह अपना दर्द बयां कर रहा है।
भेल प्रबंधन ने गोविंदपुरा में तीन हजार से ज्यादा आवासों का निर्माण किया था। वीआरएस और रिटायरमेंट के रेले के चलते इस क्षेत्र को आधे से ज्यादा खाली कर दिया है। नतीजतन मकानों में रहने वाले भेल कर्मचारी सुविधाओं को मोहताज हैं। भेल प्रबंधन के पास इस क्षेत्र को आबाद करने की कोई नयी योजना प्रस्तावित नहीं है। इस जगह का कैसे उपयोग किया जाये यह सोचने का समय भी नहीं है। करोड़ों की खाली पड़ी इस जमीन पर रसूखदारों की निगाहें लगी हुई है। ऐसे में भेल प्रबंधन को जल्द से जल्द अपनी राजस्व बढ़ाने के लिए रायसेन रोड़ मुख्य मार्ग पर दुकानों का निर्माण कर भेल कर्मचारियों के बेरोजगार बालिग बच्चों को किराये पर ही दे देना चाहिए।
