– एक ने बनाई पुरानी भेल पारदर्शी पैनल तो दूसरे लड़ेंगे नयी प्रगतिशील पैनल
– गिरी से मिलाया बंसत कुमार ने हाथ,मोरे पहुंचे नागपुरे के पास, राजनीति में सब जायज
– शुक्रवार को उम्मीदवारों को हुये चुनाव चिन्ह आवंटित अब आयेगी चुनाव प्रचार में तेजी
भोपाल
बीएचईई थ्रिफ्ट एंड के्रडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी के चुनाव के लिये शुक्रवार को निर्वाचन अधिकारी द्वारा चुनाव चिन्ह आवंटित करने के बाद उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी पैनल भी बना ली हैं अब यह पैनल तले 11 उम्मीदवारों को चुनाव लड़वायेंगे । इसी के साथ शनिवार से चुनाव प्रचार अभियान तेजी आ जायेगी । राजनीति में सब जायज है वाली कहावत इस चुनाव में चरितार्थ हो रही है इसको लेकर अटकलों को बाजार भी गर्म पिछले थ्रिफ्ट चुनाव में एक भेल पारदर्शी पैनल बनाकर चुनाव लड़े और थ्रिफ्ट पर काबिज हुये संचालक मंडल में पिछले कुछ माहों में ही दो फाड़ होने के बाद अब वह अलग-अलग पैनल बनाकर मैदान में उतरे हैं या यूं कहा जाये कि पिछले पांच साल तक एक साथ रहे और फिर अलग-अलग हो गये दो दुश्मन आमने-सामने हैं ।
बड़ी बात यह है कि यह अपनी दुश्मनी सोशल मीडिया में कुछ इस तरह निकाल रहे हैं कि लोग दातों तले उंगली दबा रहे हैं । इस चुनाव में एक और नजारा देखने को मिला है । पिछले चुनाव में भेल पारदर्शी पैनल के खिलाफ चुनाव लड़े रामनारायण गिरी ने संस्था अध्यक्ष बंसत कुमार से न केवल हाथ मिलाया है बल्कि उनकी प्रगतिशील पैनल में अपने 6 उम्मीदवार शामिल कर अपना झंडा गाड़ दिया है श्री कुमार अपने 5 उम्मीदवार ही इस पैनल से लड़ा रहे हैं वैसे पिछले 10 माह से वह अपनी पुरानी पैनल से 11 उम्मीदवार लड़ाने का दावा कर रहे थे ।
फिलहाल दो दुश्मनों के बीच मुकाबला दिलचस्प देखा जा रहा है । जिन 7 संचालकों के जीतने के बाद थ्रिफ्ट पर काबिज हुये थे उनमें से एक संजय गुप्ता आदर्श पैनल का दामन थाम चुके हैं रही बात अन्य संचालकों की तो उनमे से बंसत कुमार और सत्येन्द्र कुमार प्रगतिशील पैनल बनाकर पूर्व संचालक रामनारायण गिरी से हाथ मिलाकर संजय बारिक,रजनीकांत चौबे,विशाल वाणी,आशीष सोनी,राजमल वैरागी ,डॉ. आरएन हिरण्या,निशा वर्मा और सुनिता चौहान को चुनाव लड़वा रहे हैं । अब इस पैनल का दावा है कि मिल जुल कर सब करेंगे काम थ्रिफ्ट का ऊंचा करेंगे नाम। यह नाम कितना ऊंचा करवायेंगे यह तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चल पायेगा ।
अब दूसरे पैलन की बात करें तो इसने भेल पारदर्शी पैनल बनाकर फिर झंडा गाडऩे का मन बना लिया है । इनमें भी वही कुछ उम्मीदवार हैं जिन्होंन 5 साल तक थ्रिफ्ट में सत्ता सुख भोगा है। यह वही कमलेश नागपुरे हैं जो इस संस्था में सचिव पद पर रहे । उन्होंने इस पैनल में दम डालते हुये अपने साथ उपाध्यक्ष रहे गोतम मोरे (संस्था का कार्यकाल 5 साल श्री मोरे का रिटायरमेंट में सिर्फ 2 साल),भीम धुर्वे और राजकुमार सैनी के अलावा विजय सिंह रावत,सुरेश भगत,दशरथ राम गोंड,समीर साहु और श्रीमति किरण अनूप धामने को शामिल किया है । इसमें पिछले चुनाव में जीते 4 डायरेक्टर अपनी अहम भूमिका में दिखाई देंगे ।
यह दोनों पैनल इसलिये महत्वपूर्ण हैं कि पिछले चुनाव में एक पैनल बनाकर चुनाव जीते थे और अब दोनों आमने-सामने हैं । देखना यह है कि 13 नवंबर को होने वाले चुनाव में यह अपनी ताकत किस तरह दिखायेंगे । क्या भेल कर्मचारी मतदाता इनमें से किसी एक पैनल को जितायेगा या फिर इनमें से कुछ उम्मीदवारों को पसंद करेगा या फिर और भी चुनाव रणभूमि में उतरी किसी दूसरी पैनल को पंसद करेगा । फैसला मतदाता के हाथ मेें है ।
