भोपाल
पॉलीक्लिनिक गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया एवं संजीवनी क्लिनिक सेवानिया गोंड को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड के तहत क्वालिटी सर्टिफिकेट दिया गया है। यह प्रमाणीकरण स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा दिया गया है। इसके तहत पॉलीक्लिनिक गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया ने 91.5 प्रतिशत एवं संजीवनी क्लिनिक सेवानिया गाँड ने 92.5 प्रतिशत अंकों के साथ क्वालीफाई किया है।
भारत सरकार के दल द्वारा पिछले साल पॉलीक्लिनिक गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया का मूल्यांकन 20 और 21 दिसम्बर और संजीवनी क्लिनिक सेवानिया गोंड का मूल्यांकन 22 और 23 दिसम्बर को किया गया था। जिसमें इन संस्थाओं के सभी विभागों एवं सेवाओं को एक्सटर्नल दल द्वारा बारीकी से परखा गया था। नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड के मूल्यांकन के दौरान संस्था के सभी रिकॉर्ड्स एवं रजिस्टर देखे जाते हैं एवं मरीजों को दी जा रही सेवाओं के प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी ली जाती है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि पॉलीक्लिनिक गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया एवं संजीवनी क्लिनिक सेवानिया गोंड के 12 विभागों का मूल्यांकन चेक लिस्ट अनुसार किया गया। जिसमें महिला स्वास्थ्य, नवजात व शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, जनरल क्लिनिक, ड्रेसिंग एवं इमरजेंसी, परिवार कल्याण, संचारी रोग, असंचारी रोग, आउटरीच, फार्मेसी, लैबोरेटरी जनरल एडमिनिस्ट्रेशन सहित सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जानकारी ली गई। इस दौरान नर्सिंग ऑफिसर, एएनएम, आशा कार्यकर्ता से फील्ड के अनुभवों के बारे में पूछा गया। दल द्वारा स्टाफ की क्षमता आकलन के लिए उनका साक्षात्कार लिया गया ।
कछुए की गति से बन रहा हैं अवधपुुरी का संजीवनी
भेल के अवधपुरी में खुलने वाला संजीवनी क्लीनिक साल भर होने के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। कभी एनजीटी का रोडा तो कभी आचार संहिता का बहाना न जाने ऐेसे कई बहानों से अवधपुरी वार्ड 61 को मिलने वाला संजीवनी क्लीनिक लेटलतीफी का शिकार हो गया है। स्वास्थ्य जैसी बुनियादी और जरूरी सुविधाओं को लेकर आखिरकार किसकी लापरवाही हैं। यह शोध का विषय है। स्थानीय पार्षद की बात करें तो उनका वहीं रटारटाया सा जवाब रहता हैं। कॉलोनीवासियों के आपत्ति के कारण काम धीमे गति से चल रहा हैं। यहां सोचने वाली बात यह भी हैं कि जब यह जमीन कॉलोनी के लिए आवंटित थी तो इस जमीन पर संजीवनी क्लीनिक के चिन्हित क्यों की गई। इसका जवाब किसी भी जिम्मेदार के पास नहीं है।
