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Tuesday, March 10, 2026
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भोपाल-इंदौर के रेस्टोरेंट्स में टैक्स चोरी का खुलासा

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भोपाल

आयकर विभाग द्वारा देशभर में चलाए गए सर्वे अभियान में रेस्टोरेंट कारोबार में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है। इस कार्रवाई के दौरान भोपाल और इंदौर के दो रेस्टोरेंट संचालकों द्वारा करीब 10 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी सामने आई है। विभाग का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। जानकारी के अनुसार 8 मार्च को देशभर में रेस्टोरेंट्स पर एक साथ सर्वे अभियान चलाया गया था। इसी दौरान भोपाल के मिलन स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट और इंदौर के नानन सर ढाबा में की गई जांच में टैक्स चोरी के मामले सामने आए।
देशभर में 408 करोड़ की बिक्री छिपाने का खुलासा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक देशभर में रेस्टोरेंट्स द्वारा बिक्री छिपाने के मामलों की जांच के लिए सत्यापन अभियान चलाया गया। शुरुआती जांच में एक ही दिन के सर्वे में करीब 408 करोड़ रुपए की बिक्री छिपाने का मामला सामने आया है।

जांच में पाया गया कि कई रेस्टोरेंट संचालक बिल डिलीट करने, रिकॉर्ड में बदलाव करने और वास्तविक बिक्री कम दिखाने जैसे तरीकों से टैक्स चोरी कर रहे थे। एआई से खंगाला गया 1.77 लाख रेस्टोरेंट्स का डेटा आयकर विभाग ने नवंबर 2025 में फूड एंड बेवरेज सेक्टर में टैक्स चोरी के पैटर्न की जांच शुरू की थी। इसके तहत देशभर के करीब 1.77 लाख रेस्टोरेंट्स के लेन-देन का एआई आधारित विश्लेषण किया गया। इस डेटा की तुलना आयकर रिटर्न में घोषित टर्नओवर से की गई, जिसमें बड़ी संख्या में आय कम दिखाने के मामले सामने आए। कई स्थानों पर बिक्री का पूरा रिकॉर्ड खातों या टैक्स रिटर्न में दर्ज ही नहीं किया गया था। 46 शहरों में सर्वे, 63 हजार रेस्टोरेंट्स को नोटिस अभियान के तहत 22 राज्यों के 46 शहरों में 62 रेस्टोरेंट्स पर सर्वे किया गया। साथ ही आयकर विभाग ने “सक्षम नज”  अभियान शुरू किया है, जिसके तहत करीब 63 हजार रेस्टोरेंट्स को ईमेल और संदेश भेजकर 31 मार्च 2026 से पहले अपने आयकर रिटर्न अपडेट करने के लिए कहा गया है। सॉफ्टवेयर से डिलीट किया जाता था बिक्री का डेटा जांच में यह भी सामने आया कि कई रेस्टोरेंट संचालक “पेट पूजा” सहित अन्य सॉफ्टवेयर का उपयोग कर बिक्री का डेटा डिलीट कर देते थे ताकि वास्तविक आय कम दिखाई जा सके। भोपाल के मिलन स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट में भी इसी प्रकार के सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा था। आयकर अधिकारियों ने जांच के दौरान डिलीट किए गए डेटा को रीस्टोर कर लिया है और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए हैं। विभाग अब मामले की विस्तृत जांच कर रहा है।

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