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Friday, May 1, 2026
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भोपाल में शराब दुकानों की नीलामी फ्लॉप

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भोपाल

राजधानी में शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया इस बार नए प्रयोग के साथ शुरू हुई, लेकिन पहले ही चरण में यह प्रक्रिया पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई। 29 दुकानों के लिए 2 मार्च को आयोजित ई-टेंडर में एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ। अब आबकारी विभाग इन दुकानों के लिए दोबारा टेंडर जारी करेगा। इस बार 87 कम्पोजिट मदिरा दुकानों को 4 बड़े समूहों की बजाय 20 छोटे ग्रुप में बांटा गया है। विभाग का उद्देश्य छोटे और नए लाइसेंस धारकों को अवसर देना और बड़े ठेकेदारों के एकाधिकार को खत्म करना है। 29 दुकानों के लिए 7 ग्रुप, 520 करोड़ की आरक्षित कीमत पहले चरण में 29 दुकानों को 7 ग्रुप में शामिल किया गया था। इनकी कुल रिजर्व प्राइस लगभग 520 करोड़ रुपए तय की गई थी। इनमें बागसेवनिया, हबीबगंज फाटक, भानपुर चौराहा, स्टेशन बजरिया, खजूरीकलां, जहांगीराबाद और गुनगा समूह शामिल हैं।

सोमवार को प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन एक भी बोलीदाता सामने नहीं आया। इसके बाद विभाग ने पुनः टेंडर की तैयारी शुरू कर दी है। अन्य ग्रुप के लिए टेंडर प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। 1432 करोड़ की कुल रिजर्व प्राइस सभी 87 दुकानों की कुल आरक्षित कीमत 1432 करोड़ रुपए रखी गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2024-25 में ये ठेके 1193 करोड़ रुपए से अधिक में नीलाम हुए थे, जो लक्ष्य से करीब 11 प्रतिशत ज्यादा थे। बड़े ठेकेदारों की रणनीति? सूत्रों के अनुसार, इस बार छोटे समूह बनाए जाने से बड़े ठेकेदारों की मोनोपॉली टूट रही है। माना जा रहा है कि कुछ बड़े लाइसेंसी घाटे का माहौल बनाकर छोटे कारोबारियों को हतोत्साहित करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हो और शासन दोबारा बड़े समूह बनाने पर मजबूर हो जाए।

हालांकि विभागीय आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी अंत तक प्रत्येक ग्रुप से 50 करोड़ रुपए से अधिक का मुनाफा हुआ है। ऐसे में घाटे के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पिपलानी सबसे महंगा ग्रुप इस बार पिपलानी समूह सबसे महंगा है। इसमें पिपलानी, अयोध्या नगर, रत्नागिरी तिराहा और पटेल नगर की 4 दुकानें शामिल हैं। 20 प्रतिशत बढ़ोतरी के बाद इसकी कीमत 127 करोड़ 77 लाख 60 हजार 551 रुपए हो गई है। पिछले वर्ष इन दुकानों का वार्षिक मूल्य 106 करोड़ 48 लाख रुपए से अधिक था। इसी तरह बागसेवनिया समूह की कीमत करीब 101 करोड़ से बढ़कर 121 करोड़ 89 लाख रुपए से ज्यादा हो गई है। सरकार को 238 करोड़ अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद आबकारी विभाग का दावा है कि नई व्यवस्था से राज्य सरकार को सीधे लगभग 238 करोड़ रुपए अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। अधिकारियों का कहना है कि छोटे समूह बनाए जाने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, अधिक बोलीदाता सामने आएंगे और सरकार को लाभ मिलेगा।

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