भोपाल
मुख्यमंत्री मोहन यादव की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का असर अब प्रशासनिक फैसलों में भी दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी लगभग 100 करोड़ रुपये के टेंडरों को निरस्त कर दिया गया है। अब इन टेंडरों के तहत होने वाली खरीदी की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की जाएगी।
जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश स्कूल एजूकेशन विभाग द्वारा शैक्षणिक सामग्री और स्कूलों में उपयोग होने वाले विभिन्न उपकरणों की खरीदी के लिए टेंडर जारी किए गए थे। इनमें साइंस किट, मैथ्स किट, खेल सामग्री और अन्य शैक्षणिक संसाधनों की आपूर्ति से जुड़े प्रस्ताव शामिल थे। टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और शर्तों में बार-बार बदलाव की शिकायतें सामने आने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लिया।
बताया जा रहा है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से पात्रता शर्तों में कई बार संशोधन किए गए थे। इससे अन्य कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो गया था। शिकायतें मिलने के बाद पूरे मामले की समीक्षा की गई और अंततः सभी टेंडरों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। सूत्रों के अनुसार विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नई खरीदी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के तहत शुरू की जाए।
इसके लिए नई तकनीकी और वित्तीय शर्तें तय कर पुनः टेंडर जारी किए जाएंगे, ताकि अधिक कंपनियां इसमें भाग ले सकें और सरकारी धन का सही उपयोग हो सके। सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखना भी आवश्यक है। इसलिए किसी भी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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