भोपाल
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की आपूर्ति से हुई मौतों का मुद्दा शुक्रवार को एक बार फिर मध्य प्रदेश विधानसभा में गरमाया। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन के पटल पर आधिकारिक रूप से स्वीकार किया कि क्षेत्र में डायरिया के प्रकोप के कारण अब तक 22 लोगों की जान जा चुकी है। विपक्ष ने घेरा, स्थगन प्रस्ताव पर हुई चर्चा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, आतिफ अकील, प्रताप ग्रेवाल और राजेंद्र मंडलोई ने इस गंभीर मुद्दे को स्थगन प्रस्ताव के जरिए उठाया। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि भागीरथपुरा में दूषित पानी की शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने समय पर जांच नहीं की।
क्षेत्र के लोग लंबे समय से पानी के संकट से जूझ रहे हैं और टैंकरों पर निर्भर हैं। इंदौर नगर निगम शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल रहा है। ‘यह इंदौर के लिए कलंक है’ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने चर्चा के दौरान स्वीकार किया कि टेंडर प्रक्रिया के बाद काम शुरू होने में देरी हुई, जिसके कारण यह दुखद स्थिति बनी। उन्होंने इस घटना को ‘आत्मग्लानि और चिंता’ का विषय बताते हुए कहा, “यह घटना इंदौर के लिए एक कलंक की तरह है, जिसने स्वच्छता में देश भर में परचम लहराने वाले शहर की छवि को प्रभावित किया है”।
अधिकारियों पर कार्रवाई और मुख्यमंत्री की पहल मंत्री ने सदन को सूचित किया कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य तौर पर बजट चर्चा के दौरान ऐसे प्रस्ताव स्वीकार नहीं होते, लेकिन मुख्यमंत्री की विशेष अनुमति के कारण इस संवेदनशील मुद्दे पर जवाब दिया जा रहा है। कुल मौतें: 22 (डायरिया के कारण)।दूषित पेयजल की आपूर्ति और प्रशासनिक विलंब। मंत्री के जवाब के बाद विपक्ष का स्थगन प्रस्ताव अग्राह्य (अस्वीकार) कर दिया गया।
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