भोपाल
भोपाल नगर निगम में बिना काम कराए फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए के भुगतान के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। रविवार को सेंट्रल वर्कशॉप पर की गई छापेमारी के बाद अब टीम पिछले चार वर्षों में पास किए गए तमाम संदिग्ध बिलों के परीक्षण में जुट गई है। इस जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि ये फर्जी बिल किस कर्मचारी के स्तर से शुरू होकर किन उच्च अधिकारियों के हस्ताक्षर तक पहुंचे और इस पूरे सिंडिकेट में किसकी क्या भूमिका रही? लोकायुक्त की टीम अब उन अधिकारियों और कर्मचारियों को चिन्हित कर रही है, जिनसे जल्द ही कड़ी पूछताछ की जाएगी।
गौरतलब है कि इस घोटाले की जड़ें नवंबर 2025 में मिली एक शिकायत से जुड़ी हैं, जिसकी प्रारंभिक जांच के बाद 11 मार्च को अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के अनुसार, आरोपियों ने विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी ई-बिल तैयार किए और अपने परिचितों व रिश्तेदारों की फर्मों के नाम पर करोड़ों का भुगतान करा लिया।
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जांच में यह भी सामने आया है कि जलकार्य, सामान्य प्रशासन और केंद्रीय वर्कशॉप जैसे विभागों के नाम पर वाहनों की मरम्मत और पेंटिंग के झूठे काम दिखाए गए, जबकि हकीकत में ऐसा कोई काम हुआ ही नहीं था। कई मामलों में तो संबंधित विभागों को उनके नाम पर बने बिलों की जानकारी तक नहीं थी। फिलहाल, पुलिस ने डिजिटल डेटा और सर्वर को अपने कब्जे में लेकर जांच तेज कर दी है, जिससे जल्द ही बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
