भोपाल
विदिशा में बंपर जीत के बाद शिवराज सिंह चौहान का दिल्ली जाना तय हो गया है। 9 जून को वह नई सरकार में कैबिनेट मंत्री के तौर शपथ लेते नजर आएंगे। शिवराज सिंह चौहान न सिर्फ खुद 8 लाख से अधिक वोटों से जीते बल्कि मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों पर जीत की हैट्रिक में बड़ी भूमिका निभाई। दिल्ली के चुनाव प्रचार में भी उनका स्ट्राइक रेट अच्छा रहा। प्रचंड जीत के बाद इनाम के तौर पर शिवराज को केंद्र सरकार में बड़ी भूमिका मिल सकती है। खुद पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार में इसकी घोषणा की थी। उनके नरेंद्र मोदी सरकार की कोर टीम में रहने की संभावना बढ़ गई है। चर्चा है कि अमित शाह अब बीजेपी की कमान संभालेंगे और शिवराज सिंह चौहान को गृह मंत्रालय सौंपा जा सकता है। गृह मंत्रालय के दूसरे दावेदार राजनाथ सिंह भी हैं।
सीएम पद से हटते ही जुट गए थे मिशन-29 में, फिर बने भरोसेमंद
18 साल तक लगातार सीएम रहने वाले शिवराज सिंह चौहान के केंद्र में जाने के कयास मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से लगाए जा रहे थे। डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका दिल्ली जाना तय हो गया। राज्य की सत्ता में उलटफेर के बाद शिवराज थोड़े मायूस दिखे, मगर उन्होंने जल्द ही खुद को नए रोल के लिए तैयार कर लिया। दूसरी ओर, राजस्थान में सीएम पद नहीं मिलने के कारण वसुंधरा राजे काफी नाराज रहीं। लोकसभा चुनाव में शिवराज न सिर्फ प्रत्याशी बने, बल्कि पूरे राज्य में मिशन-29 के लिए अपनी ताकत झोंक दी। उन्होंने अपने अंदाज में पार्टी उम्मीदवारों के लिए वोट मांगे। उनकी मामा वाली छवि और योजनाओं का असर लोकसभा चुनाव परिणाम में भी दिखा। बीजेपी ने लगातार तीसरी बार सभी 29 सीटों पर कब्जा कर लिया। दूसरी ओर, राजस्थान में गुटबाजी और नाराजगी ने बीजेपी को 10 कदम पीछे धकेल दिया। इस तरह शिवराज सिंह चौहान बहुत कम समय में पीएम मोदी के भरोसेमंद सेनापति के तौर पर उभरे।
अमित शाह जाएंगे संगठन मजबूत करने, बनेंगे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष
केंद्र में बहुमत नहीं मिलने के कारण नरेंद्र मोदी पहली बार किसी गठबंधन की सरकार की अगुवाई करने वाले हैं। उन्हें अपनी कोर टीम और महत्वपूर्ण मंत्रालय में विश्वसनीय अनुभवी नेताओं की जरूरत है। पिछली सरकार में उन्होंने अमित शाह को गृह मंत्रालय दिया था। यूपी में करारी शिकस्त के बाद अमित शाह को दोबारा संगठन में भेजे जाने की जानकारी मिल रही है। इस बदलाव के बाद शिवराज सिंह चौहान ही ऐसे नेता हैं, जो उनकी कमी पूरी कर सकते हैं। पिछली सरकार में मध्यप्रदेश से दो कैबिनेट मंत्री थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया नागरिक उड्डयन मंत्री बने और कृषि मंत्रालय का जिम्मा नरेंद्र सिंह तोमर को मिला था। माना जा रहा है कि मोदी 3.0 में यह विभाग सहयोगी दलों के खाते में जा सकता है। जहां तक शिवराज की छवि सख्त प्रशासक की नहीं है, मगर बतौर मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के अंत में उन्होंने योगी मॉडल को अपना लिया था। गृह मंत्रालय पर राजनाथ सिंह की दावेदारी हो सकती है, जो पहले भी इस विभाग को देख चुके हैं। मगर भारत को अनुभवी रक्षा मंत्री की जरूरत है, इसलिए शिवराज का गृह मंत्रालय पर जाने की सूचना सही हो सकती है।
