भोपाल। अपनी लंबित मांगों और सरकार की कथित वादाखिलाफी के विरोध में बुधवार को प्रदेशभर के हजारों अतिथि शिक्षक ‘अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा’ के बैनर तले राजधानी की सड़कों पर उतरे। नीलम पार्क और आसपास के क्षेत्रों में हुए इस विशाल प्रदर्शन में शिक्षकों ने एकजुट होकर हुंकार भरी। शिक्षकों का कहना है कि सरकार ने चुनाव से पहले जो वादे किए थे, उन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया है, जिससे प्रदेश के लगभग सवा लाख परिवारों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो गया है। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने आंदोलन को संबोधित करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने अतिथि शिक्षकों को गुरुजियों की तर्ज पर नीति बनाने, सीधी भर्ती में बोनस अंक देने और 12 माह के वार्षिक अनुबंध का आश्वासन दिया था।
उन्होंने याद दिलाया कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी न्याय का भरोसा दिया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार इन वादों से पीछे हट रही है। वरिष्ठ पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि वार्षिक अनुबंध लागू न होने के कारण 30 अप्रैल के बाद बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक सेवा से बाहर हो जाएंगे। संगठन की मांग है कि अनुभवी शिक्षकों को रिक्त पदों पर प्राथमिकता के आधार पर समायोजित किया जाए। इसके अलावा, ई-अटेंडेंस में तकनीकी खामियों के कारण कई शिक्षकों का मानदेय कट रहा है और सितंबर माह का भुगतान भी अब तक लंबित है।
प्रदर्शन के दौरान बी.एम. खान और अन्य वक्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया की विसंगतियों को भी उजागर किया। उन्होंने मांग की कि स्कोर कार्ड में अनुभव के अंक 5 साल की सीमा से बढ़ाकर अधिकतम 100 अंक किए जाएं और पुरानी पात्रता परीक्षाओं (2008 व 2011) के अंकों को भी जोड़ा जाए। शिक्षकों का तर्क है कि वे सभी आवश्यक योग्यताएं पूरी करते हैं, इसलिए उनके अनुभव का सम्मान होना चाहिए।
