भोपाल। एनटीपीसी लिमिटेड के निदेशक (संचालन) रविंद्र कुमार ने एनटीपीसी बोंगाईगांव में दो दिवसीय ‘हेड्स ऑफ ऐश मैनेजमेंट मीट 2026’ का भव्य उद्घाटन किया। यह सम्मेलन “डिजिटल परिवर्तन के साथ राख के सतत उपयोग को बढ़ावा देना” विषय पर केंद्रित है, जिसका मुख्य उद्देश्य टिकाऊ और आधुनिक तकनीक-संचालित राख प्रबंधन प्रथाओं को आगे बढ़ाना है।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए रविंद्र कुमार ने राख (Fly Ash) को महज़ एक अपशिष्ट न मानकर, उसे एक मूल्यवान संसाधन के रूप में स्थापित करने के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला, जिसमें राजस्व की अपार संभावनाएं छिपी हैं। उन्होंने प्रबंधन प्रणाली में पारदर्शिता और र्यकुशलता लाने के लिए डिजिटल एकीकरण को अनिवार्य बताया। राख के बेहतर प्रबंधन और परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निदेशक ने सभी एनटीपीसी स्टेशनों से ‘एस्ट्राएम पोर्टल’ का सक्रिय रूप से उपयोग करने का आग्रह किया, ताकि ट्रैकिंग, परिवहन निगरानी और बिलिंग प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाया जा सके। इसके साथ ही, लंबी दूरी तक राख पहुंचाने के लिए रसद अनुकूलन के तहत ‘रेल-सह-सड़क’ (आरसीआर) माध्यम के अधिक उपयोग पर बल दिया गया।
पर्यावरण अनुकूलता और परिचालन दक्षता को सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने ड्राई ऐश इवैक्यूएशन सिस्टम (डीएईएस) सुविधाओं के विकास में तेजी लाने और राख के टीलों (ऐश डाइक) पर कड़े सुरक्षा मानकों को लागू करने की आवश्यकता जताई।इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में एनटीपीसी के कई वरिष्ठ अधिकारियों सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उद्घाटन सत्र के दौरान विजय चंद (आरईडी-ईआर II), आरबी मलिक (ईडी, ऐश मैनेजमेंट-एनआई), चंद्रमौली कसीना (ईडी-एसएसईए), अर्नब मैत्रा (एचओपी, बोंगाईगांव), जी. राजा शेखर (जीएम, कॉर्पोरेट विजिलेंस), अनुराग गुप्ता (जीएम, ओ एंड एम बोंगाईगांव) और सुभाष गोखले (जीएम, एएमसीसी) विशेष रूप से उपस्थित रहे। दो दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में एएमसीसी, कॉर्पोरेट विजिलेंस और यूएसएससी समूह द्वारा कई तकनीकी प्रस्तुतियां दी जाएंगी। साथ ही, व्यावहारिक समझ और समाधान-उन्मुख सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिभागियों के लिए एनटीपीसी बोंगाईगांव ऐश डाइक का एक तकनीकी दौरा भी आयोजित किया गया है।
