भोपाल। ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध की तपिश अब मध्य प्रदेश के ‘औद्योगिक इंजन’ कहे जाने वाले पीथमपुर तक पहुँच गई है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग संकट और कच्चे माल की आसमान छूती कीमतों के कारण यहाँ की लगभग 5,600 से ज्यादा औद्योगिक इकाइयां बंद होने की कगार पर हैं। पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी के अनुसार, यहाँ से होने वाला करोड़ों डॉलर का एक्सपोर्ट लगभग पूरी तरह रुक गया है।
उद्योगपति प्रोडक्शन में कर रहे भारी कटौती
स्थिति इतनी विकट है कि उद्योगपति अब प्रोडक्शन में भारी कटौती कर रहे हैं, जिसका सीधा और घातक प्रहार रोजगार पर पड़ा है। युद्ध के कारण उपजे इस आर्थिक संकट ने सबसे ज्यादा अस्थायी और कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों को प्रभावित किया है। अनुमान है कि अब तक लगभग 20 हजार कॉन्ट्रैक्ट वर्कर काम से बाहर हो चुके हैं। केवल इतना ही नहीं, कई कंपनियों ने अपने स्थायी कर्मचारियों को भी ‘ले-ऑफ’ (छंटनी) पर डाल दिया है और उन्हें केवल आधी सैलरी दी जा रही है।
ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मा, प्लास्टिक और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख सेक्टर, जो अमेरिका और यूरोप के बाजारों पर निर्भर थे, अब पूरी तरह संकट में हैं। फैक्ट्रियों में शिफ्ट कम कर दी गई हैं और कई जगह शट-डाउन की स्थिति बन चुकी है। औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों का दर्द अब छलकने लगा है।
मजदूरों के पास नहीं बचा काम
सेज सेक्टर की एक फार्मा कंपनी और प्लास्टिक फैक्ट्रियों में काम करने वाले लेबर नीतेश बघेल जैसे कई कामगारों का कहना है कि प्लास्टिक दाना महंगा होने और काम रुकने की वजह से उनकी छुट्टी कर दी गई है। मजदूरों के पास अब काम नहीं बचा है, जिसके कारण वे अपने गाँवों की ओर लौटने का मन बना रहे हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द नहीं सुधरे, तो पीथमपुर के इन उद्योगों और यहाँ आश्रित लाखों परिवारों के लिए आने वाला समय और भी भयावह हो सकता है।
