भोपाल। मप्र में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित करने तथा अवैध कॉलोनियों पर पूरी तरह नकेल कसने के लिए अब एक समान कानून लागू किया जाएगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने ‘एकीकृत कॉलोनाइजर एक्ट 2026’ का ड्राफ्ट फाइनल कर लिया है, जिसे मोहन कैबिनेट की मंजूरी के बाद आगामी मानसून सत्र में विधानसभा में पेश किया जाएगा। वर्तमान में अलग-अलग व्यवस्थाओं का फायदा उठाकर कॉलोनाइजर ग्रामीण सीमाओं में अवैध कॉलोनियां काट देते हैं, लेकिन नए कानून के तहत अब हर कॉलोनी का एक यूनिक आईडी नंबर होगा और सिर्फ रजिस्ट्री करा लेने से मकान को वैध नहीं माना जाएगा।
इस सख्त कानून में अवैध कॉलोनी बनाने वाले कॉलोनाइजरों के खिलाफ 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपए तक के भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, नए एक्ट के लागू होने से कॉलोनाइजरों को अब 11 अलग-अलग विभागों के चक्कर काटने के बजाय सिर्फ तीन विभागों से ही अनुमति लेनी होगी, जिससे ‘एक प्रदेश, एक लाइसेंस’ की पारदर्शी व्यवस्था लागू होगी। प्रस्तावित कानून के तहत पूरे प्रदेश में ऑनलाइन मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे खरीदार घर बैठे किसी भी कॉलोनी का डिजिटल रिकॉर्ड, नक्शा और उसकी वैधता देख सकेंगे। कृषि भूमि के संरक्षण के लिए डायवर्जन और ले-आउट की मंजूरी को अनिवार्य करते हुए प्लॉट की रजिस्ट्री को सीधे टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) के पोर्टल से लिंक किया जाएगा, जिससे बिना अप्रूव्ड ले-आउट वाले प्लॉट की रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी।
नए नियमों के मुताबिक कॉलोनाइजर के लिए सड़क, नाली, बिजली, पानी, सीवर और पार्क जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करना अनिवार्य होगा और काम अधूरा छोड़ने पर सरकार बैंक गारंटी जब्त कर खुद विकास कार्य कराएगी। साथ ही, शहरों की बढ़ती आबादी के दबाव को देखते हुए अब शहरों से सटे गांवों में भी कॉलोनियां बनाने की मंजूरी दी जाएगी, जिनमें निम्न व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 15 प्रतिशत मकान या जमीन आरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
