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JAIL BUILT IN BJP OFFICE BHOPAL: बीजेपी ने बनाई सांकेतिक जेल संविधान हत्या दिवस के रूप में याद किया

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JAIL BUILT IN BJP OFFICE BHOPAL: आज देश में आपातकाल के 50 साल पूरे हो गए. आज ही के दिन, 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया था. इस दौरान मध्य प्रदेश के कई बीजेपी नेताओं को भी जेल में डाल दिया गया था. यहां तक कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह को अपनी माँ के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल भी नहीं मिली थी.

भोपाल में बनी सांकेतिक जेल यादें ताज़ा करने का प्रयास

आपातकाल को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में याद करते हुए, बीजेपी ने भोपाल स्थित अपने प्रदेश कार्यालय में एक सांकेतिक जेल बनाई है. इसके साथ ही, एक प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जिसमें आपातकाल के दौरान जेल भेजे गए नेताओं और संविधान में किए गए संशोधनों के बारे में जानकारी दी गई है. इस जेल की दीवार पर इंदिरा गांधी की एक बड़ी तस्वीर लगाई गई है. इस तस्वीर में इंदिरा गांधी अपने हाथों में संविधान पकड़े हुए हैं और उसे अपनी पीठ के पीछे छिपा रही हैं. इंदिरा गांधी की तस्वीर के सामने पुलिस को दिखाया गया है, जो नेताओं पर लाठियाँ बरसा रही है, जो आपातकाल के दमनकारी माहौल को दर्शाती है.

प्रदर्शनी में आपातकाल की पूरी कहानी एक-एक घटना का ज़िक्र

बीजेपी कार्यालय में जेल की थीम पर बनी इस प्रदर्शनी में जेल की सलाखों के पीछे बंद लोग बड़े-बड़े पोस्टर पकड़े हुए दिखाए गए हैं. प्रदर्शनी में दिखाए गए पोस्टरों में आपातकाल की घटनाओं की क्रमवार जानकारी दी गई है. इसमें 1971 में इंदिरा गांधी के ख़िलाफ़ अदालत में हुए चुनावी धांधली के मामले और देश में आर्थिक संकट व महंगाई के बारे में बताया गया है. इसके अलावा, 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी को दोषी ठहराए जाने और चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य क़रार देने की बात भी विस्तार से समझाई गई है. यह प्रदर्शनी आपातकाल के उन काले दिनों की याद दिलाती है जब लोकतंत्र को निलंबित कर दिया गया था.

जेल गए नेताओं की तस्वीरें त्याग और संघर्ष की गाथा

प्रदर्शनी में आपातकाल के दौरान जेल भेजे गए बीजेपी नेताओं की तस्वीरों के साथ जानकारी भी दी गई है:

  • केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह की जेल के दौरान की एक तस्वीर लगाई गई थी और लिखा गया था कि उन्हें अपनी माँ के अंतिम संस्कार के लिए भी पैरोल नहीं मिली.
  • अरुण जेटली की एक पुरानी तस्वीर लगाई गई थी और लिखा गया था कि उन्होंने ABVP छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया और आपातकाल के पहले ही दिन उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था. बाद में वे 19 महीने तक जेल में रहे.
  • जॉर्ज फ़र्नांडिस की तस्वीर लगाकर बताया गया कि कैसे उन्होंने वेश बदलकर भूमिगत नेटवर्क चलाया और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इसका विरोध किया.
  • जोधपुर में आपातकाल के दौरान प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर ‘हम गद्दार हैं’ के तख़्तियाँ पकड़ाकर परेड कराई गई थी, जो उस समय के दमनकारी शासन की क्रूरता को दर्शाता है.

आपातकाल के 50 साल लोकतंत्र के लिए एक बड़ा सबक

आपातकाल के ये 50 साल हमें लोकतंत्र के महत्व और इसकी सुरक्षा के लिए सतर्क रहने की याद दिलाते हैं. बीजेपी द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी और कार्यक्रम उन लोगों के बलिदान को याद करने का एक प्रयास है, जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष किया. यह हमें बताता है कि कैसे संवैधानिक अधिकारों का हनन किया गया और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया.

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डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध जानकारी और बीजेपी द्वारा आयोजित कार्यक्रम पर आधारित है. आपातकाल भारतीय इतिहास का एक संवेदनशील और विवादास्पद दौर रहा है, जिसके विभिन्न पहलुओं पर अलग-अलग विचार हो सकते हैं.

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