भोपाल। समाज की रूढ़ियों को तोड़कर अपनी असली पहचान पाने की चाह अब छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंच गई है। एम्स भोपाल में पिछले एक साल के भीतर पांच ऐसे सफल मामले सामने आए हैं, जहाँ 22 से 28 वर्ष के युवकों ने जेंडर कंवर्जन सर्जरी के माध्यम से अपनी पहचान बदलकर महिला के रूप में नई जिंदगी शुरू की है।
डॉक्टरों के अनुसार, यह केवल एक सर्जरी नहीं बल्कि एक लंबी मानसिक, शारीरिक और सामाजिक प्रक्रिया है। जेंडर चेंज कराने वाले युवाओं की कहानियाँ दिल को झकझोर देने वाली हैं। राजगढ़ के सोमेश और रीवा के अनुराग जैसे युवाओं ने बचपन से ही खुद को भीतर से महिला महसूस किया। अनुराग को जहाँ बचपन में अपने व्यवहार के कारण शारीरिक और मानसिक शोषण का सामना करना पड़ा, वहीं भोपाल के आनंद को परिवार के तानों ने पूरी तरह औरत बनने के लिए प्रेरित किया। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के बाद इन युवाओं ने एम्स भोपाल के ट्रांसजेंडर क्लीनिक का रुख किया, जहाँ सफल ‘बॉटम सर्जरी’ के बाद वे अब एक महिला का जीवन जी रहे हैं। एम्स भोपाल के स्त्री रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार डोरा ने बताया कि पुरुष से महिला बनने की यह प्रक्रिया अत्यंत जटिल होती है। इसमें पुरुष अंगों को हटाकर महिला अंगों का निर्माण किया जाता है। निजी अस्पतालों में इस प्रक्रिया का खर्च 8 से 10 लाख रुपए तक आता है, लेकिन एम्स में यह सर्जरी फिलहाल निशुल्क की जा रही है।
सर्जरी से पहले मरीजों की लंबी काउंसलिंग, मानसिक मूल्यांकन और हार्मोन थेरेपी की जाती है ताकि वे भावनात्मक दबाव में कोई गलत निर्णय न लें। रिपोर्ट में एक ऐसा मामला भी सामने आया जहाँ इंदौर के एक युवक ने कानपुर में सर्जरी कराई, जो फेल हो गई। गलत सर्जरी के कारण न केवल शारीरिक क्षति हुई बल्कि भविष्य के लिए कई संवेदी समस्याएँ भी पैदा हो गईं। अंततः एम्स भोपाल की टीम ने 24 अप्रैल को करीब 8 घंटे चली जटिल सर्जरी के बाद मरीज के अंगों को नए सिरे से ठीक किया। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अधूरी जानकारी या असुरक्षित केंद्रों पर कराई गई सर्जरी जानलेवा साबित हो सकती है।
