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Monday, February 23, 2026
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सांसद आलोक शर्मा द्वारा बड़ा तालाब से अतिक्रमण और प्रदूषण हटाने के संबंध में बुलाई बैठक

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आज सांसद आलोक शर्मा ने भोपाल कलेक्टर कार्यालय में बड़ा तालाब से अतिक्रमण हटाने, प्रदूषण रोकने और भोपाल के बड़े तालाब की सेहत सुधारने और इसे भू-माफियाओं से बचाने, तालाब का नये सिरे से मास्टर प्लान बनाकर इसे संरक्षित करने के लिए बैठक आहूत की थी। बैठक में, कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह, एडीएम अंकुर मेश्राम, नगर निगम अपर आयुक्त तन्मय वशिष्ठ शर्मा, सभी एसडीएम, पूर्व बीडीए अध्यक्ष कृष्णमोहन सोनी, भोपाल चेंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष गोविंद गोयल, क्रेडाई के अध्यक्ष मनोज मीक, भोपाल नर्सिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ अनूप हजेला, डॉ शैलेश लुनावत, सुनील जैन 501, पर्यावरण मित्र सुयश कुलश्रेष्ठ, नितिन सक्सेना, उमाशंकर तिवारी सहित एप्को, मप्र प्रदूषण बोर्ड, राजस्व, नगर निगम के अधिकारी गण उपस्थित थे। सांसद शर्मा ने कहा कि भोपाल का बड़ा तालाब ऐतिहासिक जल धरोहर है। इसे सजाना, संवारना और संरक्षित करना, हम सब की जवाबदारी है। उन्होंने कहा कि बड़ा तालाब आज गंभीर प्रदूषण और अतिक्रमण की चपेट में है।

तालाब का कुल भराव क्षेत्रफल 31 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन अतिक्रमण और सूखे के कारण यह क्षेत्र 8-9 किलोमीटर में ही सिमट कर रह गया है। इसके आसपास प्रकृति आधारित वातावरण और जल चरित्र की वजह से यहां उन्नत किस्म की जैवविविधता का विकसित है। यहां प्रतिवर्ष लगभग 20 हजार पक्षीयों की प्रजातियां देखी जाती है। जिनमें व्हाईट स्टार्क, काले गले वाले सारस, हंस आदि प्रमुख हैं। हाल ही में यहां भारत का विशालतम पक्षी सारस क्रेन भी देखा गया था, जो कि आकार और उड़ने के लिए प्रसिद्व है। नगर निगम के अधिकारी यह भी बताऐं कि भोपाल के बड़े तालाब में कितने गंदे नालों के पानी को रोकने के लिए कितने एसटीपी बनाए हैं? वर्तमान में कितने शेष गंदे नालों का पानी बड़े तालाब में मिल रहा है? भविष्य में इस गंदे पानी को बड़े तालाब में जाने से रोकने के लिए नगर निगम भोपाल की ओर से क्या प्लानिंग है? आज तालाब के किनारे बने अवैध फार्म हाउसेज में ड्रग्स की पार्टियां चल रही हैं।

किसी दिन शहर शर्मसार न हो इसको रोकना आवश्यक है। पूर्व में बड़े तालाब का क्षेत्रफल 39.8 वर्ग किलोमीटर था, जो कि घटकर 30 वर्षो में यह 29.8 वर्ग किलोमीटर रह गया है? बड़े तालाब के किनारे फार्म हाउस नहीं बन सकते हैं, फिर भी बड़ा तालाब के किनारे गलत तरीके से फार्म हाउस का निर्माण होना, पक्के मकान बनना तालाब की सीमा को खत्म करना है। बड़ा तालाब से अतिक्रमण हटाने के लिए एनजीटी ने अब कितने आदेश जारी किये हैं ? कितने आदेशों का पालन जिला प्रशासन और नगर निगम ने किया है।

तालाब के आसपास भविष्य में कोई अतिक्रमण न हो और एनजीटी के आदेश पर अमल करने के लिए कोई टीम गठित की है क्या? इस टीम ने क्या क्या कार्यवाही की है? कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह ने सभी एसडीएम से अलग-अलग चर्चा कर जानना चाहा कि अतिक्रमण हटाने के लिए क्या कार्रवाई की। उन्होंने हफ्ते भर की मोहलत चारों एसडीएम को दी है कि एक हफ्ते में सभी मेजर प्राइमा फेसी अतिक्रमण बड़े तालाब के किनारे से हटाए जाएं। और हर हफ्ते अतिक्रमण हटाने और प्रदूषण रोकने के संबंध में समीक्षा बैठक की जाएगी।

सांसद शर्मा ने कहा कि मैं यह भी जानना चाहता हॅू कि भदभदा डेम के पास प्रेमपुरा से 227 झुग्गियां हटाई गयी हैं थी, किन्तु आज तक 26 झुग्गीयां वहां शेष हैं। वे अभी तक क्यों नहीं हटायी गयी हैं? उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज पूरा भोपाल वक्फ बोर्ड की जागीर हो गया है। भोपाल की जनता की सहुलियत के लिए मेट्रो ट्रेन की लाईन डालो, तो कहते हैं कि यह वक्फ की जमीन है। जब मैं भोपाल का महापौर था तब मैंने पोलेटेक्निक चौराहा से डिपो चौराहा तक स्मार्ट रोड़ बनानी चाही, तब भी कहने लगे यह वक्फ की जगह है। लेकिन तब मैंने स्मार्ट सिटी रोड बनाकर भोपाल की जनता की सेवा की। इसी प्रकार से जब भोपाल के हमीदिया रोड स्थित सब्जी मंडी की जगह पर पीपीपी मॉडल पर बस स्टैण्ड बनाने गये, तो कहते हैं कि यह वक्फ बोर्ड की जगह है।

सांसद शर्मा ने कहा कि तालाब की गहराई और एरिया को लेकर सेप्ट की रिपोर्ट, केपीएमजी की रिपोर्ट, कुमार एसोसिएट्स द्वारा किए गए सर्वे की रिपोर्ट, यह सारी रिपोर्ट है सार्वजनिक की जाना चाहिए। सेप्ट की रिपोर्ट के आधार पर जो पीले कलर की मुनारे तालाब के किनारे लगाई गई थी उनको भी लोगों ने उखाड़ कर फेंक दिया। तालाब का पुनः सर्वे किया जाना चाहिए।

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अब भोपाल में किसी को भी वक्फ बोर्ड के नाम पर, इनायत हिब्बे के नाम पर, लैण्ड जिहाद के नाम पर गुंडागर्दी करने की अनुमति नहीं दी जायेगी। तालाब सुरक्षित रहे, इसमें जाने वाला सीवेज रूके। एसटीपी बनाए जायें। इसका एरिया सुरक्षित रहे। इसमें प्रदूषण न हो। इसके आसपास किसी भी तरह का अवैध कंस्ट्रक्शन न हो। इसका लैण्ड यूज फिर से बनाया जाये। तालाब का सोर्स एरिया सुरक्षित रहे। कुल मिलाकर भोपाल के बड़े तालाब का नए सिरे से सर्वे किया जाकर इसका मास्टर प्लान तैयार किया जाये। तभी हम विरासत से विकास के संकल्प को पूरा कर पाएंगे।

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