भोपाल। मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों के साथ कथित तौर पर दोहरा रवैया अपनाने को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। यह स्थिति लोक शिक्षण आयुक्त द्वारा जारी उस नए आदेश के बाद बनी है, जिसमें विभाग के सभी कर्मचारियों के लिए आगामी १ जुलाई २०२६ से मोबाइल एप के माध्यम से ई-अटेंडेंस लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस आदेश के सामने आने के बाद अब शिक्षकों और उनके संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। उनका तर्क है कि जब ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता पूरे विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों पर समान रूप से लागू की जा रही है, तो फिर स्वैच्छिक स्थानांतरण (तबादला) नीति में केवल शिक्षकों के सामने ही ९० प्रतिशत ई-अटेंडेंस की कड़ी शर्त रखना कहाँ तक न्यायसंगत है? शिक्षकों का आरोप है कि विभाग ने उनके मामले में जानबूझकर जनवरी से मार्च २०२६ तक की अवधि की अटेंडेंस का मापदंड तय किया है, जो व्यावहारिक रूप से गलत है। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के इस नए आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि १ जुलाई २०२६ से “हमारे शिक्षक” एप के माध्यम से ई-अटेंडेंस दर्ज करने की व्यवस्था केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विभाग के अंतर्गत आने वाले समस्त कार्यालयों और प्रशिक्षण संस्थानों में कार्यरत सभी शासकीय कर्मचारियों एवं अधिकारियों पर समान रूप से लागू होगी।
ऐसे में तबादला नीति में केवल शिक्षकों को ही ९० प्रतिशत उपस्थिति की अव्यावहारिक शर्त से बांधना उनके साथ अन्याय है। उन्होंने बताया कि जनवरी, फरवरी और मार्च २०२६ के दौरान प्रदेश भर के शिक्षक बोर्ड परीक्षाओं के संचालन, कॉपियों के मूल्यांकन कार्य, विभागीय प्रशिक्षण, जनगणना और एसआईआर जैसी अन्य महत्वपूर्ण शासकीय ड्यूटियों में लगातार मैदानी स्तर पर व्यस्त रहे थे। इन बाहरी ड्यूटियों और कई तकनीकी दिक्कतों के कारण अधिकांश शिक्षकों की नियमित ई-अटेंडेंस प्रभावित हुई है।
