भोपाल। राजधानी स्थित सीएसआईआर-एडवांस्ड मटेरियल एंड प्रोसेस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एम्प्री) ने सड़क निर्माण के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी मिसाल पेश की है। संस्थान ने देश की पहली ऐसी सड़क विकसित की है, जिसमें पारंपरिक सीमेंट का बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया गया है। यह सड़क बिजली संयंत्रों से निकलने वाले अपशिष्ट ‘फ्लाई ऐश’ (राख) और ‘जियोपॉलिमर’ तकनीक की मदद से तैयार की गई है, जो कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
इस नई तकनीक के परिणाम पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद उत्साहजनक हैं। पारंपरिक सीमेंट सड़कों की तुलना में इस सड़क के निर्माण से कार्बन उत्सर्जन में लगभग 83 प्रतिशत की कमी आती है। साथ ही, इसके निर्माण के दौरान 80 प्रतिशत कम ऊर्जा की खपत होती है। इस सड़क की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बनाने के बाद पानी से तराई (क्यूरिंग) करने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूती के मामले में यह सड़क सामान्य सीमेंट की सड़कों के बराबर ही टिकाऊ है। यह मात्र 21 दिनों में 35 से 40 एमपीए (MPa) तक की मजबूती हासिल कर लेती है। इस महत्वपूर्ण परियोजना की नींव 2 फरवरी को एन. कलईसेल्वी द्वारा रखी गई थी, जबकि इसका औपचारिक शुभारंभ विनोद कुमार की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। यह नवाचार न केवल औद्योगिक कचरे के प्रबंधन की समस्या का समाधान करेगा, बल्कि भविष्य में पर्यावरण अनुकूल बुनियादी ढांचे (ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर) के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।
