भोपाल। मप्र में 1 जून से अधिकारी-कर्मचारियों के तबादलों का दौर शुरू हो गया है, जो 15 जून तक चलेगा। डॉ. मोहन यादव कैबिनेट की मंजूरी के बाद सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा जारी वर्ष 2026 की नई तबादला नीति के तहत सभी विभाग स्वैच्छिक और प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण आदेश जारी कर सकेंगे।
इस सिलसिले में पीएचक्यू के निर्देश पर जिलों में आरक्षक से एसआई स्तर के बदलाव शुरू हो चुके हैं, जबकि शिक्षा विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने भी क्रमशः अफसरों की डिटेल और संविदा कर्मियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। नई नीति के तहत विभागों में कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तबादलों का प्रतिशत तय किया गया है, जिसके तहत 200 तक की संख्या वाले विभागों में अधिकतम 20%, 200 से 1000 तक में 15%, 1000 से 2000 तक में 10% और 2001 से अधिक कर्मचारी वाले विभागों में केवल 5% ही तबादले किए जा सकेंगे। हालांकि, पति-पत्नी को एक स्थान पर रखने और बीमारी से जुड़े स्वयं के व्यय वाले मामलों को इस नीतिगत सीमा से बाहर रखा गया है।
नई तबादला नीति में कार्यपालिक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक ही स्थान पर तीन वर्ष की अवधि तय की गई है, लेकिन यदि कोई कर्मचारी वित्तीय वर्ष के निर्धारित लक्ष्य (टारगेट) को पूरा नहीं कर पाता है, तो प्रशासनिक आधार पर उसका तबादला तीन साल से पहले भी किया जा सकेगा। रिक्त पदों की पूर्ति के लिए श्रृंखलाबद्ध (चेन) तबादलों पर पूरी तरह रोक रहेगी। नीति में मानवीय और संवेदनशील पहलुओं का विशेष ध्यान रखते हुए महिला कर्मचारियों और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को बड़ी राहत दी गई है। अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को उनके गृह जिले में पदस्थ करने का प्रावधान किया गया है, जबकि जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम का समय बचा है, उनका सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं होगा। इसके अलावा मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को दो कार्यकाल यानी चार वर्ष तक स्थानांतरण से छूट मिलेगी।
