भोपाल। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित पत्र ने मध्य प्रदेश और राजस्थान की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में मध्य प्रदेश कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं निखिल, बिलाल और इनाम को पुलिस ने हिरासत में लिया है।
कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने इस कार्रवाई को अवैध बताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की घोषणा की है। सांसद विवेक तन्खा ने बताया कि साइबर पुलिस ने बिना किसी वाजिब कारण के कार्यकर्ताओं को 30 घंटे से अधिक समय से हिरासत में रखा है। उन्होंने मुख्यमंत्री और डीजीपी को टैग करते हुए इस कार्रवाई पर निराशा जताई। तन्खा के मुताबिक, जिस पत्र को लेकर कार्रवाई हो रही है, वह 15-16 अप्रैल से ही लाखों लोगों द्वारा साझा किया जा रहा था, जबकि इसे 18 अप्रैल की रात फर्जी बताया गया। ऐसे में चुनिंदा कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई करना न्यायोचित नहीं है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उक्त पत्र में महिला आरक्षण की आड़ में ‘अवैध परिसीमन’ के गंभीर संकेत मिलते हैं। उन्होंने भाजपा पर बौखलाहट का आरोप लगाते हुए कहा, “पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के साथ मजबूती से खड़ी है। अगर कार्रवाई करनी है तो मुझ पर और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर की जाए, निर्दोष कार्यकर्ताओं पर नहीं।”
कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने अंदेशा जताया कि राजस्थान पुलिस इन कार्यकर्ताओं को अपने साथ ले जाने की तैयारी में है। दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस पत्र का खंडन किया है। उन्होंने इसे ‘शुभचिंतकों की कारगुजारी’ बताते हुए कहा कि ‘सांच को आंच नहीं’। राजे ने स्पष्ट किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का पूरी तरह समर्थन करती हैं और भ्रम फैलाने वाले लोग एक बार फिर विपक्ष में ही बैठेंगे।
