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Thursday, March 19, 2026
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अरावली की पहाड़ी में तकिया-चादर लेकर छिपे नूंह हिंसा के आरोपी, डरे ग्रामीण भी शामिल

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नूंह

हरियाणा के नूंह में हिंसा हुई। इस हिंसा ने पूरे हरियाणा को हिलाकर रख दिया। सांप्रदायिक दंगे गुरुग्राम और फरीदाबाद समेत हरियाणा के अन्य जिलों में भी भड़के। हालांकि पांच दिनों से नूंह शांत है। हरियाणा की शांति भंग करने वाले उपद्रवियों की तलाश पुलिस कर रही है। अधिकांश आरोपी फरार हैं। इसी बीच अरावली पहाड़ियों की शांत सुंदरता के बीच, एक परेशान करने वाली वास्तविकता सामने आ रही है। नूंह हिंसा में शामिल आरोपी गिरफ्तारी के डर से अरावली की पहाड़ियों में छिपे हैं। इन बीहड़ इलाकों में वे गद्दे, तकिया और चादर लेकर रह रहे हैं। आरोपियों के अलावा गांव के नागरिक भी पुलिस से इतना डरे हैं कि अपना घर छोड़कर यहां दिनरात गुजार रहे हैं।

सोमवार को जब विश्व हिंदू परिषद की ब्रज मंडल यात्रा नीचे से गुजरी तो वही ऊंचाई हमलावरों के लिए सुविधाजनक स्थान बन गई थी। यहीं पहाड़ियों से पथराव किया गया। यात्रा पर गोलियां चलाई गईं। इंडिया टुडे की टीम अरावली की इन पहाड़ियों तक पहुंची, जहां से जलाभिषेक यात्रा पर गोलियां और पत्थर बरसाए गए थे। जैसे-जैसे टीम अरावली की पहाड़ियों की तरफ अंदर गई यहां अलग ही नजारा देखने को मिला।

डर से छिपे ग्रामीण
पाया गया कि नूंह जिले के गांवों के कई स्थानीय लोग गिरफ्तारी से बचने के लिए इन पहाड़ियों में छिपे हैं। अपना चेहरा ढंके हुए एक निवासी ने दावा किया कि उसे गिरफ्तारी का डर है, इसलिए वह यहां छिपा है। उन्होंने इंडिया टुडे को बताया, ‘हम पुलिस के डर से पहाड़ों में छिपे हुए हैं। वे आते हैं और आपको बिना पूछे उठा लेते हैं कि आप हिंसा में शामिल थे या नहीं यह जांच नहीं की जा रही।’

आरोपी और ग्रामीण दोनों ही छिपे
ग्रामीण ने कहा कि संदिग्ध दंगाई शरण मांग रहे ग्रामीणों के बीच मिल गए हैं। उसने कहा जो लोग वहां गए (दंगों में भाग लिया) और जो नहीं गए वे भी यहां-वहां हैं। पूरा गांव भाग गया है। गांव वाले तितर-बितर हो गए हैं। मामले की प्राथमिकी के अनुसार, सोमवार को नूंह जिले के एक मंदिर में धार्मिक सेवा को बाधित करने के लिए कई स्थानीय लोग अवैध हथियार, लाठियां और पत्थर लेकर पहाड़ों से उतरे।

पहाड़ियों की आवाजाही पर नजर
उस दिन ऊंचाई से गोलीबारी और पथराव के वीडियो भी सामने आए हैं, जो दावों की पुष्टि करते हैं। खाट पर बैठे युवा ग्रामीण ने बताया कि ये पहाड़ अब लगभग 500 लोगों के लिए एक अस्थायी शिविर बन गए हैं। पकड़ से बचने के लिए दूर से पुलिस वाहनों की आवाजाही पर लगातार नजर रखते हैं।

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