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‘ये सभी माइंस के दलाल’, नक्सलियों ने पद्मश्री हेमचंद मांझी समेत छह लोगों के लिए जारी किया मौत का फरमान

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रायपुर

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में नक्सलियों ने पद्मश्री वैद्यराज हेमचंद मांझी समेत छह लोगों को जान से मारने की धमकी दी है। इन लोगों पर खदानों की दलाली करने और पुलिस कैंप का समर्थन करने का आरोप है। नक्सलियों ने धौड़ाई में एक पर्चा फेंका है, जिसमें इन्हें ‘जनअदालत’ में मौत की सजा देने की बात कही गई है। इस धमकी से इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। कुछ महीने पहले ही नक्सलियों ने वैद्यराज मांझी के भतीजे की हत्या कर दी थी।

इनलोगों के लिए जारी किया मौत का फरमान
नक्सलियों ने पद्मश्री से सम्मानित वैद्यराज हेमचंद मांझी, सरपंच हरिराम मांझी, नारायण नाग, तिलक बेलसरिया, परिवहन संघ अध्यक्ष शरद और रामेश्वर बघेल को निशाना बनाया है। नक्सलियों का आरोप है कि ये सभी आमदाई खदान के समर्थक हैं और पुलिस की मदद करते हैं। उन्होंने धमकी दी है कि अगर ये लोग गांव वापस लौटे तो उन्हें ‘जनअदालत’ में मौत की सजा दी जाएगी।

जनअदालत में चलता नक्सलियों का कानून
यह ‘जनअदालत’ नक्सलियों द्वारा चलाया जाने वाला एक गैरकानूनी ‘न्यायालय’ होता है, जहां वे अपना कानून चलाते हैं। नक्सलियों ने पर्चे में लिखा है कि कब तक गांव के बाहर रहोगे। इन्हें जनअदालत में मौत की सजा दी जाएगी। सागर साहू के जैसी इनको मौत दी जाएगी।

पंचायत चुनाव से ठीक पहले फरमान
यह घटना त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से ठीक पहले हुई है, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है। लोग डरे हुए हैं और अपने घरों से निकलने से भी कतरा रहे हैं। पुलिस ने इस धमकी को गंभीरता से लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

वैद्यराज हेमचंद मांझी हैं जाने माने वैद्य
वैद्यराज हेमचंद मांझी एक जाने-माने वैद्य हैं और उन्हें पिछले साल ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री से सम्मानित किया था। वे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के जानकार हैं और आदिवासी समुदाय में उनका काफी सम्मान है। कुछ महीने पहले ही नक्सलियों ने उनके भतीजे की हत्या कर दी थी, जिसके बाद से वे नारायणपुर जिला मुख्यालय में रह रहे हैं।

आमदाई खदान का समर्थन करने वालों को मौत की सजा दी जाए
नक्सलियों द्वारा जारी किए गए पर्चे में लिखा है कि आमदाई खदान का समर्थन और मदद करने वालों को मौत की सजा दी जाए। इससे साफ होता है कि नक्सली खनन गतिविधियों का विरोध कर रहे हैं और इसे स्थानीय लोगों के लिए नुकसानदेह मानते हैं। वे खदानों को पर्यावरण और आदिवासी संस्कृति के लिए खतरा मानते हैं। यह पहली बार नहीं है जब नक्सलियों ने किसी पद्मश्री पुरस्कार विजेता को निशाना बनाया है। इससे पहले भी कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रमुख लोगों को नक्सलियों की धमकियों का सामना करना पड़ा है।

हाल ही में गरियाबंद जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 16 नक्सली मारे गए थे। इनमें से 12 नक्सलियों पर कुल 3 करोड़ 16 लाख रुपये का इनाम था। मारे गए नक्सलियों में नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का सदस्य चलपति भी शामिल था। यह मुठभेड़ ओडिशा बॉर्डर पर स्थित भालूडिग्गी जंगल में हुई थी।

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