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फ्री वाली स्कीमें क्या रेवड़ियां हैं, फ्री की गजक हैं या फिर मदद? केजरीवाल-कांग्रेस और बीजेपी में छिड़ गया संग्राम

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नई दिल्ली

मुफ्त वाली स्कीमों का मामला एक तरफ तो सुप्रीम कोर्ट में है तो दूसरी तरफ इस पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। कोई मुफ्त वाली स्कीमों को मुफ्त की रेवड़ी कहने पर आपत्ति जता रहा है तो कोई सवाल कर रहा है कि अगर गरीबों को सुविधा देना रेवड़ी है तो ‘अमीरों को मुफ्त में दिए जाने वाले ‘गजक’ पर कब बहस होगी। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसे विपक्षी दल बीजेपी को घेर रहे हैं। बीजेपी भी विपक्ष पर जानबूझकर बहस को गलत दिशा देने और ‘मुफ्त की रेवड़ियों’ और ‘कल्याणकारी योजनाओं’ में जानबूझकर भ्रम पैदा करने की कोशिश का आरोप लगा रही है।

बीजेपी समझा रही’ रेवड़ी’ और ‘जनकल्याण’ के काम में अंतर
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने मुफ्त की रेवड़ी शब्द पर ऐतराज जताते हुए बीजेपी को अहंकार में नहीं डूबने की नसीहत दी है। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी रेवड़ी और कल्याणकारी योजनाओं का फर्क समझा रही है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लिए काम करना बेनिफिट के दायरे में आता है। जबकि मुफ्त की रेवड़ियों का मतलब शॉर्ट-टर्म बेनिफिट है। उन्होंने कहा कि मुफ्त की रेवड़ियों से सिर्फ अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी का भला होता है। संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल ने एक स्कीम पर 19.5 करोड़ रुपये खर्च किए जिसमें दिल्ली सरकार ने सिर्फ 2 लोगों को कुल मिलाकर 20 लाख रुपये का कर्ज दिया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी पर हमला बोलते हुए पात्रा ने कहा, ‘अरविंद केजरीवाल का सिर्फ एक लक्ष्य है- AAP और अरविंद केजरीवाल को देश में स्थापित करना और उनकी आकांक्षाओं को पूरा करना। इसीलिए वह हर दिन झूठ पर झूठ परोसते हैं।’ बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल दावा करते हैं कि कॉर्पोरेट्स को फायदा पहुंचाया जा रहा है। वह जरा इन आंकड़ों को देख लें। 2018-19 में सरकार को कॉर्पोरेट टैक्स के तौर पर 6.63 लाख करोड़ रुपये मिले थे। वहीं 2021-22 में कोरोना महामारी के बावजूद 7.1 लाख करोड़ रुपये कॉर्पोरेट टैक्स के रूप में मिले।

एक दिन पहले गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी आम आदमी पार्टी और केजरीवाल पर मुफ्त में सौगात की चर्चा को गलत मोड़ देने की कोशिश का आरोप लगाया था। उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर पलटवार करते हुए कहा कि वह लोगों को मुफ्त में सौगात दिए जाने पर चर्चा को ‘अनुचित मोड़’ दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आप नेता शिक्षा और स्वास्थ्य को इस मामले में शामिल कर लोगों के मन में डर पैदा करने का एक प्रयास कर रहे हैं जबकि इन दोनों पर खर्च को कभी मुफ्त की रेवड़ी नहीं कहा गया है।

मुफ्त की रेवड़ी कहकर जनता को अपमानित मत कीजिए : AAP
आम आदमी पार्टी ने मुफ्त की रेवड़ी शब्द पर ऐतराज जताया है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने शुक्रवार को सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने ‘मित्रों’ के 11 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया है। सिंह ने कहा, ‘जबसे अरविंद केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी की बीजेपी सरकार की असलियत जनता के सामने रखी है, पूरी की पूरी भारतीय जनता पार्टी, इन बड़े-बड़े नेता, सरकार के मंत्री बौखला गए हैं लेकिन उनके पास कोई जवाब नहीं है। आम आदमी पार्टी का सवाल है कि अपने मित्रों के 11 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर दिया लेकिन आम जनता की बारी आती है तो आटे पर टैक्स, दूध पर टैक्स, दही पर टैक्स, पेट्रोल पर टैक्स, दवाओं पर टैक्स। ऐसा क्यों करते हैं।’

संजय सिंह ने कहा, ‘बीजेपी देश की करोड़ों जनता का यह कहकर बार-बार अपमान कर रही है कि तुमको मुफ्त की रेवड़ी दी जाती है, तुमको मुफ्त की रेवड़ी दी जाती है। तुमको मुफ्त की रेवड़ी आगे से नहीं देंगे। भाजपाइयों, इतना अहंकार में मत रहो। जिन निःशुल्क सेवाओं को मुफ्त की रेवड़ी कह रहे हो वो जनता के पैसे से दी जा रही है। जनता टैक्स के पैसे से सरकार का खजाना भरती है और उसी जनता के पैसे से जनता को सुविधाएं दी जाती है। इसलिए इसे मुफ्त की रेवड़ी कहकर जनता को अपमानित मत कीजिए। प्रधानमंत्री जी, उसी जनता के पैसे से आप 11 करोड़ की गाड़ी से घूमते हैं, हवाई जहाज में उड़ते हैं।’

अमीरों को मुफ्त में दिए जाने वाले गजक पर कब होगी बहस : कांग्रेस
कांग्रेस ने भी पीएम मोदी को उनके ‘रेवड़ी कल्चर’ वाले बयान को लेकर घेरा है। पार्टी ने पूछा कि अगर गरीबों को दी जाने वाली सुविधाएं रेवड़ी हैं तो अमीरों को फायदा पहुंचाने वाली ‘गजक’ कैसे अच्छी हो गई? कांग्रेस प्रवक्ता गौरव बल्लभ ने कहा, ‘देश में इस बार 14 जनवरी के पहले रेवड़ियों की चर्चा बहुत हो रही है। लेकिन समस्या यह है कि देश की सरकार को मुफ्त की रेवड़ियां तो दिखती हैं। लेकिन जो मुफ्त की गजक बंट रही है, वह उन्हें दिख नहीं रही है। आप कहेंगे कि रेवड़ी और गजक में क्या अंतर है? रेवड़ी गुड़, चाशनी, तिल और घी के मिश्रण से बनती है। उस एक मिश्रण से, जिससे एक गजक बनती है, उसमें सैकड़ों रेवड़ियां बन जाती हैं। अगर मुफ्त की रेवड़ियां खराब हैं तो मोदी जी मुफ्त की गजक कैसे अच्छी हो गई?’

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