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मणिपुर में हथियारबंद समूह बने बड़ा खतरा, 48 दिन बाद भी क्यों नहीं थम रही हिंसा?

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नई दिल्ली,

मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच 3 मई से शुरू हुई हिंसा अब भी जारी है. वहां हिंसक झड़पों में अब तक 100 से भी ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है. 10 हजार घर जलाए जा चुके हैं. 4100 से ज्यादा आगजनी की घटनाओं को दर्ज किया जा चुका है. डर के कारण हजारों लोग पलायन कर चुके हैं. सैकड़ों लोग तो मिजोरम और असम भाग गए हैं. करीब 50 हजार लोगों को राहत शिविरों में रखा गया है.

केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री आरके रंजन का घर तक फूंक डाला गया. शांति बहाल करने के लिए कई बार प्रयास किए जा चुके हैं लेकिन हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं. सरकार और सरकारी तंत्र की कोई सुनने को तैयार नहीं है. केंद्रीय सशस्त्र बल की 84 कंपनियों को राज्य में तैनात किया गया है, असम राइफल्स के भी 10 हजार से ज्यादा जवान तैनात हैं, लेकिन सड़कों पर भारी सैन्य बल होने के बाद भी स्थिति बिगड़ती जा रही है.

मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह ने एक बार फिर हथियारों से लैस लोगों से हमला न करने की अपील की है. उन्होंने कहा- वे किसी पर हमला न करें, शांति बनाकर रखें ताकि हम राज्य में सामान्य स्थिति बहाल कर सकें. हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर बात नहीं मानी तो परिणाम भुगतने तैयार रहें. इसके अलावा सीएम ने कहा कि हिंसा के डर से अपने घरों छोड़कर भागे लोगों को बसाने के लिए उनके सरकार तीन से चार हजार प्री-फैब्रिकेटेड घरों का निर्माण करेगी, इन घरों का निर्माण दो महीने में हो जाएगा.

SC पहुंचा मणिपुर में हिंसा का मामला
मणिपुर में हिंसा का मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. कोर्ट में याचिका दाखिल कर आदिवासियों की सुरक्षा का इंतजाम सेना से कराने की गुहार लगाई गई है. मामले में शीघ्र सुनवाई के लिए मेंशन किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि यह मामला गंभीर है. मामला पूरी तरह से कानून व्यवस्था से जुड़ा हुआ है. लिहाजा फिलहाल सेना के दखल पर अदालत को आदेश जारी नहीं करना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने तीन जुलाई को नियमित पीठ के आगे सुनवाई की जाने की बात कही.

सीनियर वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गुहार लगा रहा हूं. सरकार के सुरक्षा सुनिश्चित करने के एलान और आश्वासन के बाद भी 70 आदिवासियों की हत्या हुई है. ऐसे में हम सेना के जरिए सुरक्षा निश्चित करने का आदेश जारी करने की अपील करते हैं. इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां ​​अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है. यह बात पहले भी पिछली याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान भी अदालत को बताई गई है. उस याचिका को गर्मी छुट्टियों के बाद सुनने के लिए सूचीबद्ध किया गया था. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह कानून और व्यवस्था का गंभीर मुद्दा है. मुझे उम्मीद है कि कोर्ट को सेना के हस्तक्षेप आदि के लिए आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है.

तो क्या इसलिए नहीं थम रहीं हिंसा
– केंद्रीय गृह मंत्री 29 मई को तीन दिन के दौरे पर इंफाल पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए विभिन्न मैतेई और कुकी समूहों से मुलाकात की थी. सूत्रों के मुताबिक दोनों समूहों ने आश्वासन दिया कि वे राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए काम करेंगे, लेकिन इसके बाद भी उग्रवादी समूह शांति बहाल के लिए तैयार नहीं हैं.

– जद(यू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने मणिपुर हिंसा के लिए बीजेपी को दोषी माना है. उनका कहना है, ‘बीजेपी सरकार की लापरवाही और लचर रवैए से मणिपुर में हालात बेकाबू हो चुके हैं. कई दिनों से राज्य दो समुदायों के आपसी विवाद से जल रहा है. कई लोग मर चुके हैं और हजारों लोग, महिलाएं और बच्चे अपने घर-बार छोड़ अस्थायी टेंटों में रहने में विवश हैं. दूसरी तरफ सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है.’ अगर मणिपुर में भाजपा के अलावा किसी दूसरे दल की सरकार होती तो केंद्र कब का उसे बर्खास्त कर चुकी होती, लेकिन अपने नेताओं के भ्रष्टाचार और उनकी अकर्मण्यता बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को दिखायी नहीं देती.’

– एक हिंदी न्यजू पेपर ने दावा किया है कि CM एन बीरेन सिंह ने अपने इंटरव्यू में कहा है कि मणिपुर में फैली हिंसा के पीछे राज्य के बाहर से आए लोग, म्यांमार से आए जिम्मेदार हैं. यह कुकी-मैतेई की लड़ाई नहीं है, बल्कि म्यांमार से आए घुसपैठिए हिंसा फैला रहे हैं.

 

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