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तवांग में भारतीय सेना की चौकी को उखाड़ फेंकने की कोशिश, क्या जिनपिंग ने चीन में सत्ता बचाने को रची बड़ी साजिश?

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बीजिंग

एक तरफ जीरो कोविड नीति के खिलाफ जनता का गुस्‍सा और दूसरी तरफ धाराशायी होती अर्थव्‍यवस्‍था, चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग इस समय अपने देश में कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। लेकिन इन चुनौतियों का समाधान तलाशने की जगह वह भारत के साथ वास्‍तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर उलझने की साजिश रच रहे हैं। साल 2020 में जब पूरी दुनिया वुहान से निकले कोविड-19 वायरस का सामना कर रही थी तो पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (PLA) के सैनिक गलवान घाटी में हिंसा कर रहे थे। चीनी सेना के सुप्रीम कमांडर जिनपिंग पहले ही अपने सैनिकों को भारत के साथ जंग के लिए तैयार रहने को कह चुके हैं। इस बार फिर इसी सोच के साथ अरुणाचल प्रदेश के तवांग में साजिश रची गई थी। नौ दिसंबर को तवांग में करीब 300 भारतीय सैनिक दाखिल हो गए थे। लेकिन भारतीय सैनिकों ने बहादुरी के साथ इन्‍हें खदेड़ दिया। साफ है कि जिनपिंग के शैतानी दिमाग में कहीं कोई साजिश चल रही है।

ध्‍यान हटाने की कोशिश
साल 2020 में गलवान घाटी हिंसा के बाद जिनपिंग ने कहा था कि पीएलए को भारत के साथ युद्ध के लिए तैयार रहना होगा। उन्‍होंने जवानों से सारा दिमाग और ऊर्जा युद्ध की तैयारी में निवेश करने के लिए कहा था। हाल ही में हुई राष्‍ट्रीय कांग्रेस के दौरान भी जिनपिंग ने युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक चीन की अर्थव्‍यवस्‍था इस समय मुश्किल दौर से गुजर रही है। जीरो कोविड नीति के सख्‍त नियमों के तहत जनता पहले ही जिनपिंग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर चुकी है। जिनपिंग जो अपनी सत्‍ता की हनक बरकरार रखना चाहते हैं, वह देश की मुश्किलों से ध्‍यान हटाने की कोशिशों में लगे हैं। ऐसे में एलएसी पर भारत कको उलझाने के अलावा कोई और बेहतर विकल्‍प उन्‍हें नहीं मिल सकता है।

प्रदर्शन से डरे जिनपिंग
पिछले दिनों जिनपिंग ने जीरो कोविड नीति के तहत लागू सख्‍त नियमों में ढील देने का फैसला कर दिया है। जीरो कोविड नीति के खिलाफ चीन के कई हिस्‍सों में बड़े स्‍तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। इन प्रदर्शनों में छात्रों की संख्‍या हैरान करने वाली थी। छात्र, अपने उस राष्‍ट्रपति से पद छोड़ने की मांग कर रहे थे जो अजीवन शासन का सपना पाल रहा है। चीन मामलों के जितने भी विशेषज्ञ थे, वह यकीन नहीं कर पा रहे थे कि प्रदर्शन इस हद तक एतिहासिक हो रहे हैं कि ये तियानमेन स्‍क्‍वॉयर की याद दिला रहे हैं। अप्रैल 1989 में हुआ तियानमेन आज भी एतिहासिक प्रदर्शनों में शामिल है। विशेषज्ञों की मानें तो कोविड नीति में ढील के फैसले को राहत के तौर पर तो देखना ही चाहिए। साथ ही साथ इन्‍हें जिनपिंग की एक कमजोरी के तौर पर भी देखा जाना चाहिए।

हीरो बनने की कोशिश
लगातार प्रदर्शनों की वजह से उन पर दबाव बढ़ रहा था। ऐसे में कम्‍युनिस्‍ट पार्टी में सीनियर रैंक्‍स पर मौजूद दूसरे नेता भी उनके खिलाफ विद्रोह कर सकते थे। विशेषज्ञों की मानें तो कोविड नीति में ढील को जिनपिंग की कमजोर नस के तौर पर देखा जाएगा। न सिर्फ उनकी पार्टी के नेता बल्कि अब देश और विदेश में मौजूद चीनी नागरिक भी उन्‍हें कमजोर नेता के तौर पर देखेंगे। उनका कहना है कि जिनपिंग को जीरो कोविड नीति का मास्‍टरमाइंड माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक जिनपिंग जानते हैं कि राष्‍ट्रवाद की भावना को फिर से देशवासियों में जगा कर वह खुद को मजबूत कर सकते हैं। भारत के साथ जंग या जंग की कोशिश या फिर ऐसी कोई भी कोशिश उन्‍हें जनता का हीरो बना देगी।

और आक्रामक हो रहा चीन
तवांग में चीन की मंशा पर सवाल उठना लाजिमी है। तवांग में चीनी सेना के हमला अचानक नहीं है बल्कि एक सोची समझी साजिश है। ताइवान की सरकार की तरफ से आया बयान इसकी पुष्टि कर देता है। ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू मानते हैं कि चीन, भविष्‍य में होने वाले हमले की तैयारी कर रहा है। उनकी मानें तो चीनी राष्‍ट्रपति जिनपिंग ने अपना तीसरा कार्यकाल सुरक्षित कर लिया है। ऐसे में चीनी सेनाओं की तरफ से बढ़ने वाला खतरा और ज्‍यादा गहरा गया है। उन्‍होंने बताया कि कैसे साल 2020 के बाद से चीनी घुसपैठ की संख्‍या में पांच गुना तक इजाफा हुआ है। उनकी मानें तो चीन एक और मिलिट्री ड्रिल की तैयारी कर रहा है।

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