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भजनलाल सरकार ने पलटा गहलोत ‘राज’ का बड़ा फैसला, मंत्री बोले- आपातकाल को न्याय संगत नहीं कहा जा सकता

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जयपुर:

राजस्थान की भाजपा सरकार ने पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार का एक और फैसला बदल दिया है। भाजपा सरकार ने मीसा बंदियों की पेंशन फिर से शुरू करने का बिल विधानसभा में पारित किया है। पूर्व में भी कांग्रेस के शासन में मीसा बंदियों की पेंशन बंदी की जाती रही है, जिसे भाजपा सरकार हर बार पुनः शुरू करती थी। अब सरकार ने विधेयक लाकर इसे पारित कराया है, ताकि भविष्य में विधानसभा की अनुमति के बिना मीसा बंदियों की पेंशन बंद नहीं की जा सकेगी। यह एक संयोग ही है कि शुक्रवार को राजस्थान विधानसभा और छत्तीसगढ़ विधानसभा में मीसा बंदियों की पेंशन जारी रखने के विधेयक पारित किए गए।

जो 30 या इससे अधिक दिन जेल में रहे, उन्हें मिलती रहेगी पेंशन
शुक्रवार को विधानसभा में राजस्थान लोकतंत्र के सेनानियों का सम्मान विधेयक 2024 पारित किया गया। इस विधेयक के मुताबिक, आपातकाल के दौरान 30 दिन या इससे ज्यादा समय तक जेल में रहने वाले बंदियों को हमेशा पेंशन दिए जाने का प्रावधान किया गया। मीसा बंदियों को स्वतंत्रता सेनानी माना गया है। अगर किसी स्वतंत्रता सेनानी की मृत्यु हो जाती है तो इस स्थिति में उनकी पत्नी या पति को पेंशन दी जाएगी। पेंशन की राशि 20 हजार रुपये प्रतिमाह होगी। इसके अतिरिक्त चार हजार रुपये प्रतिमाह चिकित्सा सुविधा के लिए भी दिए जाएंगे। मीसा बंदियों को पेंशन दिए जाने के लिए सरकार की ओर से 40 करोड़ रुपये का बजट का दिया जाएगा। राजस्थान में 1140 मीसा बंदी हैं, जिन्हें पेंशन का लाभ मिलेगा।

आपातकाल को न्याय संगत नहीं कहा जा सकता: मंत्री
विधेयक पेश करने के दौरान विपक्ष के सदस्यों ने इसका विरोध किया था। इस पर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि आपातकाल के दौरान हजारों लोगों को घरों से निकाल कर जबरन जेलों में बंद कर दिया था। बिना किसी अपराध के कई महीनों तक जेल में रखा गया। ऐसे में आपातकाल को किसी भी सूरत में न्याय संगत नहीं कहा जा सकता। पटेल ने कहा कि न्यायपालिका के निर्णय के खिलाफ जाकर तत्कालीन सरकार ने अवैधानिक तरीके से आपातकाल लागू किया था। इससे पूरे देश में डर का वातावरण बनाया गया था। आपातकाल में सबसे ज्यादा नुकसान वंचित वर्ग के लोगों को हुआ। उन्हें संबल देने के लिए राज्य सरकार यह विधेयक लेकर आई है।

विपक्ष ने दर्ज कराया विरोध
इस बिल का विरोध करके हुए विपक्ष के सदस्यों ने सत्ता पक्ष के सदस्यों से काफी बहस की। विपक्ष के सदस्यों ने अपना विरोध दर्ज कराया । नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि भाजपा बेवजह अतीत को कुरेद रही है। उन दिनों जो परिस्थितियां बनी, उसी के अनुसार सरकार ने अपना निर्णय लिया था। जुली ने कहा कि आपातकाल का जिन लोगों ने विरोध किया, वे लोग आपकी पार्टी के थे। ऐसे में भाजपा अपनी पार्टी से जुड़े लोगों को पेंशन देने के लिए यह बिल लेकर आई है। उन्होंने कहा कि अघोषित आपातकाल तो आज भी लगा हुआ है, देश में चुनी हुई सरकारों को गिराया जा रहा है।

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