हाल ही में पहलगाम के पास बसे बाइसरन वैली में हुए आतंकी हमले में 26 आम लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने कश्मीर घाटी के 87 में से 48 पर्यटन स्थलों को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया है। यह कदम सुरक्षा बलों की कार्रवाई को आसान बनाने और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।सरकार ने जिन 48 जगहों को बंद किया है, उन्हें या तो एक्टिव ऑपरेशन जोन माना गया है या फिर वे संभावित खतरे वाले इलाकों में आते हैं। ये अस्थाई रूप से फिलहाल के लिए बंद है और हालात के अनुसार समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाएगी। चलिए आपको बताते हैं कौनसे टूरिस्ट प्लेसेस हैं जहां अभी आप नहीं जा सकते।
ये पर्यटन स्थल रहेंगे बंद
कुछ पर्यटन स्थलों को फिलहाल बंद कर दिया गया है, जिनमें यूसमर्ग, टौसीमैदान, डूडपटरी, बांगुस, करिवान डिवर चंदीगाम, अहर्बल, काउसरनाग, वुलर/वाटलाब, रामपोरा बांगुस वैली, राजपोरा और चेअरहार आदि शामिल हैं। वहीं, जो पर्यटन स्थल अभी खुले हैं, वहां सुरक्षा बढ़ा दी गई है। घाटी में पर्यटकों की संख्या पहले ही घट रही है, खासकर 22 अप्रैल को टूरिस्टों की दर्दनाक हत्या के बाद से। श्रीनगर एयरपोर्ट पर आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी गिरावट देखी गई। 23 अप्रैल को 112 उड़ानों के जरिए कुल 17,653 यात्री आए-गए। इनमें से 6,561 लोग पहुंचे और 11,092 लोग रवाना हुए। वहीं 24 अप्रैल को कुल 15,836 यात्रियों की आवाजाही हुई, जिसमें 4,456 लोग आए और 11,380 लोग घाटी से बाहर गए।
टूरिस्ट के लिए क्या है एडवायजरी
कश्मीर घाटी घूमने की योजना बना रहे पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे नई ट्रेवल एडवायजरी पर ध्यान दें और सतर्क रहें। आप उन इलाकों से दूर रहें जहां सुरक्षा बलों का ऑपरेशन चल रहा हो, वहीं स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें।22 अप्रैल को एक दर्दनाक आतंकी हमले में कम से कम 26 आम नागरिकों की जान चली गई, जिनमें 25 भारतीय पर्यटक और एक नेपाली नागरिक शामिल थे। इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया है और इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
इससे क्या असर पड़ सकता है
इस हमले का असर कश्मीर के हर क्षेत्र पर देखने को मिल सकता है, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान टूरिस्ट को हो सकता है, जो लोग वहां होटल खोलना, बिजनेस शुरू करना या फल का व्यापार करना चाहते थे, वो अब थोड़ा डगमगा रहे हैं। इससे कश्मीर की अर्थव्यवस्था जो कई सालों में थोड़ी बहुत ठीक भी हुई थी, फिर से कमजोर पड़ सकती है। साथ ही कश्मीर के लोगों की कमाई पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है।
